नई दिल्ली, प्रेट्र। अफसरों की आपसी लड़ाई के चलते सुर्खियों के केंद्र में रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को इस हफ्ते नया मुखिया मिल सकता है। देश की प्रमुख जांच एजेंसी के मुखिया का चुनाव करने के लिए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी की बैठक होगी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) के महानिदेशक वाई सी मोदी रेस में सबसे आगे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस बैठक में प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई या उनका प्रतिनिधि और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल होंगे। बैठक में जिन नामों पर चर्चा होने की संभावना है उनमें 1982 बैच के आइपीएस अधिकारी जे के शर्मा और परमिंदर राय के नाम शामिल हैं। ये दोनों ही अधिकारी वरिष्ठता क्रम में तो सबसे ऊपर हैं, लेकिन सीबीआइ में काम करने का इनका अनुभव कम है।

इस महीने की 31 तारीख को सेवानिवृत होने जा रहे राय हरियाणा कैडर के अधिकारी हैं। वह फिलहाल राज्य सतर्कता ब्यूरो के महानिदेशक हैं, यही जिम्मेदारी उन्हें सीबीआइ प्रमुख के योग्य बनाती है।

सीबीआइ मुखिया के लिए प्रमुख दावेदारों में गृह मंत्रालय में विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) के पद पर तैनात 1983 बैच की अधिकारी रीना मित्रा भी शामिल हैं। वह पांच वर्षो तक सीबीआइ में भी तैनात रही हैं और मध्य प्रदेश में लंबे समय तक राज्य सतर्कता विभाग में तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामलों की जांच में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। अगर मित्रा का चयन होता है तो वह सीबीआइ की प्रमुख बनने वाली पहली महिला अधिकारी होंगी।

एनआइए के महानिदेशक और 1984 बैच के असम-मेघालय कैडर के आइपीएस अधिकारी वाई सी मोदी भी सीबीआइ प्रमुख के पद की दौड़ में हैं। यहां तक कि इस पद की रेस में वह सबसे आगे भी बताए जा रहे हैं। वह 2002 में गुजरात में हुए दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल का 2010 से 2012 तक हिस्सा भी रह चुके हैं। गुजरात के पूर्व मंत्री हरेन पंड्या की हत्या की जांच करने वाली सीबीआइ टीम में भी वह शामिल थे।

1984 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आइपीएस अधिकारी और बीएसएफ के महानिदेशक रजनीकांत मिश्रा को भी इस पद के लिए दावेदारों में माना जा रहा है। इस पद की रेस में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फोरेंसिक साइंस के मौजूदा अध्यक्ष और 1984 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आइपीएस अधिकारी जावीद अहमद भी शामिल हैं। अहमद के पास सीबीआइ में 13 वर्षो तक काम करने का लंबा अनुभव भी है। वह 1994 से लेकर 2002 तक एसपी से डीआइजी तक के पद पर काम कर चुके हैं। जबकि, 2009 से 2014 तक सीबीआइ में संयुक्त निदेशक रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश की डीजीपी भी रह चुके हैं।

Posted By: Manish Negi

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