नई दिल्ली, प्रेट्र। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार सुबह पाकिस्तान के रास्ते किर्गिस्तान नहीं जाएंगे। इस बैठक का आयोजन 13-14 जून को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हो रहा है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बुधवार को बताया, 'वीवीआइपी विमान के बिश्केक जाने के लिए भारत सरकार ने मार्ग के दो विकल्पों पर विचार किया था।

अब फैसला लिया गया है कि वीवीआइपी विमान ओमान, ईरान और मध्य एशियाई देशों के रास्ते बिश्केक के लिए उड़ान भरेगा।' हालांकि एक पाकिस्तानी अधिकारी ने सोमवार को बताया था कि भारतीय प्रधानमंत्री के विमान को अपने वायुक्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति देने के लिए इमरान सरकार सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गई है। ऐसे में भारत सरकार के फैसले ने कई लोगों को आश्चर्यचकित किया है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी के विमान को उड़ान की अनुमति देने के लिए भारत की ओर से ही पाकिस्तान सरकार से अनुरोध किया गया था।

26 फरवरी को बालाकोट में जैश-ए-मुहम्मद के शिविरों पर एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने भारत के लिए अपना वायुक्षेत्र बंद कर दिया था। अभी भी उसने 11 में से सिर्फ दो मार्ग ही खोले हैं।मालूम हो कि भारत सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब एक हफ्ते पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने-अपने भारतीय समकक्षों को अलग-अलग पत्र लिखा था। इनमें उन्होंने द्विपक्षीय बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई थी। 26 मई को इमरान खान ने मोदी को फोन करके दोनों देशों के लोगों की बेहतरी के लिए साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई थी।

प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए विश्वास और हिंसा व आतंकवाद मुक्त माहौल बनाया जाना बेहद जरूरी है।दूसरी बार प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद मोदी पहली बार आठ सदस्यीय एससीओ की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं, जबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान पहली बार इस बैठक में शिरकत करेंगे। हालांकि बैठक से इतर दोनों नेताओं के बीच कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं होगी। जबकि प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन समेत अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।

चीनी राष्ट्रपति बिश्केक रवाना
एससीओ की 19वीं बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग बुधवार को किर्गिस्तान रवाना हो गए। चीन संकेत दे चुका है कि राष्ट्रपति चिनफिंग बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी और एकपक्षीय व्यापार नीतियों के खिलाफ यूनाइटेड फ्रंट बनाने की जरूरत को रेखांकित करेंगे। इसके अलावा आर्थिक और सुरक्षा (खासतौर पर आतंकवाद के परिप्रेक्ष्य में) सहयोग भी एजेंडे में हैं।

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Posted By: Manish Pandey

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