नई दिल्‍ली, जेएनएन/एजेंसियां। एलएसी पर जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) के साथ फोन पर बात की और उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) में जीत की 75वीं वर्षगांठ के समारोह की सफलता और रूस में संवैधानिक संशोधनों के लिए हुए सफल मतदान के समापन पर बधाई दी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी फोन कॉल के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया और सभी क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराई। 

पुतिन ने साझेदारी निभाने का वादा किया 

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति पुतिन द्विपक्षीय संपर्क बनाए रखने के लिए सहमत हुए ताकि इस साल के अंत तक भारत में वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा सके। PM मोदी ने द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन के स्वागत के लिए अपनी उत्सुकता व्यक्त की। पुतिन ने दोहराया कि भारत के साथ रूस सभी क्षेत्रों में विशेषाधिकार रणनीतिक साझेदारी को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

बातचीत के साथ ही रक्षा खरीद 

दोनों नेताओं ने कोरोना महामारी के नकारात्मक परिणामों को दूर करने के लिए किए गए प्रभावी उपायों पर चर्चा की। साथ ही कोरोना संकट के बाद की चुनौतियों से मिलकर मुकाबला करने के लिए अपनी रिश्‍तों के महत्व पर भी सहमति जताई। हालांकि जानकार इस बातचीत को रक्षा खरीद के फैसलों से भी जोड़ कर देख रहे हैं। भारत सरकार गुरुवार को रक्षा खरीद के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला किया। इसमें 21 मिग-29 नए युद्धक विमान खरीदने के साथ ही मौजूदा 59 मिग-29 विमानों को अत्याधुनिक बनाना भी शामिल है।  

रूस की मदद की होगी जरूरत 

इन दोनों फैसलों को अमली जामा पहनाने के लिए रूस की मदद की जरूरत होगी। गुरुवार के फैसले के मुताबिक भारत रूस की मिग-29 बनाने वाली कंपनी को 7400 करोड़ रुपये का आर्डर देगा। भारत ने यह आर्डर तब देने का फैसला किया है जब अमेरिका की तरफ से रूस के साथ किसी भी तरह का द्विपक्षीय कारोबार करने पर रोक लगी हुई है। इस प्रतिबंध की वजह से ही शुरू में अमेरिका ने रूस से एंटी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली एस-400 खरीदने के भारत के फैसले का काफी विरोध किया था।  

नजदीकी सहयोग पर सहमत 

वहीं रूस ने अपने बयान में कहा है कि दोनों नेताओं ने रूस और भारत के एजेंडे में मौजूद सामयिक मसलों पर बातचीत की और द्विपक्षीय सामरिक साझेदारी पर प्रतिबद्धता जताई। यही नहीं दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संघों में नजदीकी सहयोग पर सहमत हुए। प्रधानमंत्री ने 24 जून 2020 को मास्को में आयोजित सैन्य परेड में भारतीय टुकड़ी की भागीदारी को याद करते हुए इसे स्‍थाई दोस्ती का प्रतीक भी बताया। 

चीन से तनाव के बीच बातचीत 

गौरतलब है कि यह बात ऐसे वक्‍त में हुई है जब पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन के साथ तनाव बना हुआ है। बीते दिनों भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान रूस ने भारत को भरोसा दिया था कि वह S-400 एंटी मिसाइल सिस्टम जैसे कई महत्वपूर्ण हथियारों की डिलिवरी जल्‍द करेगा। भारत को रूस से कई हथ‍ियारों की डिलिवरी होनी है जिनमें से कई के ऑर्डर दिए गए हैं जबकि कुछ का पेमेंट भी हो चुका है। इससे पहले भी ऐसा हुआ है जब भारत की जरूरत पर रूस ने हथियारों की तरंत डिलिवरी की है। 

दिखेगा कूटनीतिक असर 

अभी भारत अपनी तमाम रक्षा जरूरतों का 60 फीसद तक रूस से खरीदता है। दो दशक पहले तक यह 90 फीसद तक था। इस खरीद के दूसरे कूटनीतिक असर भी दिखने को मिलेगा। खास तौर पर जब रूस और चीन के बीच संबंध काफी मजबूत हैं और अमेरिका व भारत के बढ़ते रिश्तों को लेकर पूर्व में रूस ने कुछ असमंजस भी दिखाया लेकिन अब जबकि भारत ने उसे भारी रक्षा सौदा देने की तैयारी कर ली है तो इसके सकारात्मक असर द्विपक्षीय रिश्तों पर और साफ तौर पर दिखाई देगा।

2036 तक रूसी सत्‍ता पर काबिज रहेंगे पुतिन 

बता दें कि व्लादिमीर पुतिन अब रूस की सत्‍ता पर साल 2036 तक काबिज रहेंगे। रूसी जनता ने इसके लिए जरूरी संविधान संशोधन पर मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 2036 तक पद पर बने रहने का प्रावधान करने वाले संविधान संशोधन कानून पर जनता की राय मांगी गई थी। इस पर मतदान हुआ जिसमें जनता ने उक्‍त संसोधन की मंजूरी दी। अब संविधान संशोधन कानून के जरिए पुतिन को मौजूदा कार्यकाल के बाद छह-छह साल के लिए राष्ट्रपति पद के दो अतिरिक्त कार्यकाल मिलने निश्चित हैं। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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