नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 और 13 जून को वर्चुअल तरीके से G7 शिखर सम्मेलन के सत्र में भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पीएम मोदी देश में मौजूदा कोरोना वायरस स्थिति को देखते हुए G7 समूह के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यूके की यात्रा नहीं करेंगे। गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि G7 के अध्यक्ष के रूप में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 और 13 जून को आउटरीच सत्र में भाग लेंगे। ब्रिटेन ने भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है। यह दूसरी बार है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 में भाग लेंगे।

G-7 शिखर सम्मेलन 11-13 जून तक चलेगा। अमेरिका के राष्‍ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन अपने पहले विदेश दौरे पर ब्रिटेन पहुंचे हैं। यहां पर जी-7 शिखर सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए पहंचे हैं। उनकी ये यात्रा कई मायनों में बेहद खास है। जी-7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल है। इस सम्मेलन में महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए कोरोना वैक्सीन की उपलब्‍धता, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण जैसे कुछ खास मुद्दों पर बातचीत होगी।

कहा ये भी जा रहा है कि इसमें वैक्‍सीन की सप्‍लाई को लेकर दबाव भी डाला जाएगा। आपको बता दें कि ये सम्‍मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब कई देश और वैश्विक संगठन लगातार इस बात को कह रहे हैं कि अमीर देश अपने यहां मौजूद वैक्‍सीन की अतिरिक्‍त खुराक को गरीब देशों के लिए दान में दें। इसलिए ये मुद्दा पूरे जोर-शोर से उठने की उम्‍मीद है।

गौरतलब है कि अमेरिका और ब्रिटेन भी वैक्‍सीन को दान में देने की बात कर चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की यह एलान करने की योजना है कि अमेरिका फाइजर के 50 करोड़ खुराक खरीदेगा और 92 कम और मध्यम आय वर्ग वाले देशों और अफ्रीकी संघ को दान देगा। इस ऐतिहासिक कदम से दुनियाभर में इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलेगी।

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