नई दिल्ली, एएनआइ। ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और श्रीलंका के नेताओं के साथ वर्चुअल समिट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Prime Minister Narendra Modi) सोमवार को  डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडेरिकसन  (Denmark counterpart Mette Frederiksen) के साथ वर्चुअल समिट (virtual summit) में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार,  द्विपक्षीय समिट  (Ministry of External Affairs)  से दोनों देशों के बीच परस्पर संबंध को मजबूत करने में मदद मिलेगी। 

भारत और डेनमार्क के बीच 400 साल पुराना ऐतिहासिक और करीब 70 साल पुराना राजनयिक संबंध है। करीब 5 हजार भारतीय पेशेवर डेनमार्क की (Danish) दिग्गज कंपनियों  में काम कर रहे हैं । साथ ही वहां दशकों से 20 भारतीय आइटी कंपनियां मौजूद हैं।  

MEA के अनुसार, दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध का ऐतिहासिक लिंक, लोकतांत्रिक परंपराओं में समानता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता की साझा इच्छा पर आधारित हैं। भारत-डेनमार्क के बीच वर्चुअल मीटिंग के दो अहम मुद्दे हैं- पहला दो देशों के बीच बौद्धिक संपदा सहयोग के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होना।

वर्चुअल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन दोनों नेताओं को दोनों देशों के बीच समय-परीक्षण के अनुकूल संबंधों के संदर्भ में द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक ढांचे की व्यापक रूप से समीक्षा करने का अवसर देगा। आपसी हित के प्रमुख मुद्दों पर सहयोगात्मक साझेदारी को मजबूत और गहरा किया। साथ ही आपसी हित के प्रमुख मुद्दों पर एक मजबूत और गहरी सहयोगात्मक साझेदारी के लिए व्यापक राजनीतिक दिशा मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि भारत और डेनमार्क के बीच शनिवार को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। इसे लागू करने के लिए दोनों देशों को एक द्विवार्षिक कार्य योजना तैयार करना होगा। इसमें ही गतिविधियों को पूरा करने की विस्तृत योजना शामिल होगी।

एमओयू का उद्देश्य अधिकारियों, व्यवसायों और अनुसंधान तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच आईपी जागरूकता पर सर्वोत्तम प्रथाओं, अनुभवों व ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों के बीच आईपी सहयोग को बढ़ाना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, तकनीकी आदान-प्रदान एवं आउटरीच गतिविधियों में सहयोग करना है। 

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