नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंशवादी भ्रष्टाचार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि देश के कुछ राज्यों में यह राजनीतिक संस्कृति का रूप ले चुका है। इस कठिन चुनौती से देश खोखला होता जा रहा है। सतर्कता और भ्रष्टाचार पर सीबीआइ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस का मंगलवार को उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के किसी एक मामले में कार्रवाई न करने से भविष्य के बड़े घोटालों और भ्रष्टाचार की नींव तैयार होती है। वंशवादी भ्रष्टाचार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित होता रहता है। कई दशकों में इसकी जड़े इतनी गहरी हो जाती हैं देश के सामने बहुत कठिन हालात बन जाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में हमने देखा है कि जब भ्रष्टाचारियों की किसी पीढ़ी को दंडित नहीं किया गया तो उनकी अगली पीढ़ी और भी भ्रष्ट होती चली गई। कुछ राज्यों में तो भ्रष्टाचार राजनीतिक संस्कृति बन गया है। पीढ़ियों और खानदानों में पनपने वाला भ्रष्टाचार दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है।

भ्रष्टाचार मामले में  लालू यादव लंबे समय से जेल में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में कल पहले चरण के लिए मतदान होने जा रहा है। इस चुनाव में जदयू और भाजपा गठबंधन ने तेजस्वी यादव को निशाने पर ले रखा है। तेजस्वी महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा हैं। तेजस्वी के पिता लालू यादव भ्रष्टाचार के मामले में लंबे समय से जेल में हैं।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जब भ्रष्टाचार के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई नहीं होती है तो उसे समाज में एक तरह की मान्यता मिल जाती है। लोग जानते हैं, मीडिया जानता है कि कुछ लोगों ने गलत तरीके से करोड़ों रुपये कमाए हैं लेकिन कार्रवाई न होने से लोग इसे सामान्य तौर पर लेने लगते हैं। यह स्थिति देश की प्रगति में बहुत बड़ी बाधा है। आत्मनिर्भर और खुशहाल भारत के रास्ते में यह बड़ी रुकावट है।

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लेनी होगी सामूहिक जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि अकेले भ्रष्टाचार ही आर्थिक अपराध नहीं है। ड्रग्स, मनी लांड्रिंग, आतंकवाद, आतंकी फंडिंग भी ऐसे अपराध हैं जो आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने, प्रभावी तरीके से आडिट करने और अंकुश लगाने वालों को दक्ष बनाने की जरूरत है। भ्रष्टाचार से कोई एक एजेंसी मुकाबला नहीं कर सकती है। इसके लिए सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का दुष्परिणाम सबसे ज्यादा गरीबों ने भोगा है। लेकिन आज उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का सौ फीसद लाभ मिल रहा है। आर्थिक लाभ सीधे खाते में जाने से सरकार को भी 1.78 लाख करोड़ की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि देश में दशकों तक हजारों करोड़ के घोटालों का दौर रहा। लेकिन वह दौर अब बीत चुका है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार को कतई बख्शने वाली नहीं है। 2014 से अब तक देश में 1500 से अधिक गैरजरूरी कानून खत्म किए जा चुके हैं। लोगों को डिजिटल विकल्प मिलने से उनकी जिंदगी बहुत आसान हो गई है। लोगों की जिंदगी में सरकार का बहुत दखल नहीं होना चाहिए। जहां जरूरी हो वहीं सरकार की भूमिका दिखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने शपथ लेते ही काला धन वापस लाने और जांच के लिए एसआइटी (विशेष जांच दल) का गठन किया था। एसआइटी का गठन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम भारत को नेतृत्वकर्ता देशों की श्रेणी में ले जाना चाहते हैं। इसके लिए अहम है कि हमारा प्रशासनिक तंत्र पारदर्शी, जिम्मेदार और जवाबदेह हो। भ्रष्टाचार इस तरह के तंत्र का सबसे बड़ा शत्रु होता है। इस कॉफ्रेंस के दौरान भ्रष्टाचार की रोकथाम के उपायों पर सरकार, गृह मंत्रालय, महालेखा नियंत्रक (कैग) और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी विचार मंथन करेंगे। इसमें विदेशी न्यायालयों के अधीन मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए उचित रणनीति पर भी विचार होगा। इस कांफ्रेंस का वार्षिक आयोजन सीबीआइ की ओर से 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक होता है।

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