जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। PM Modi Swearing Ceremony: पीएम नरेंद्र मोदी के नए कैबिनेट में शामिल पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर इस मंत्रिमंडल के सबसे अप्रत्याशित चेहरा भी हैं। वर्ष 1977 के बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी सुब्रहमणियन जयशंकर को चीन और अमेरिका मामलों के विशेषज्ञ के तौर पर जाना जाता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कूटनीतिक व व्यापारिक वार्ताओं में भी उनकी प्रतिभा का लोहा माना जाता है। 

भारतीय कूटनीति में उक्त दोनो चीजों की अभी जरुरत है। एक तरफ जहां अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक सामंजस्य स्थापित करना है तो दूसरी तरफ डब्लूटीओ के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय हितों की रक्षा करनी है। संभवत: इन्ही वजहों से पीएम मोदी ने जयशंकर को कैबिनेट में शामिल किया है और यह संदेश भी दे दिया है कि सरकार की विदेश नीति सतर्क व आक्रामक रहेगी।

भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी के तौर पर एस जयशंकर की छवि एक तेज तर्रार और चुनौतियों का समाधान निकालने वाले अधिकारी के तौर पर है। जनवरी, 2015 में उन्हें पीएम मोदी की पहल पर विदेश सचिव बनाया गया था। वह अमेरिका के विदेश सचिव वर्ष 2013 से वर्ष 2016 तक रहे। अमेरिका से पहले वह चीन में भारत के राजदूत रह चुके हैं। 

बतौर विदेश सचिव जयशंकर ने पहले भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता शुरु कराने में अहम भूमिका निभाई तो चीन के साथ सालाना शीर्ष स्तरीय बैठक शुरु करवाने में भी उनकी भूमिका खासी अहम रही। इसके पहले बतौर राजदूत उन्होंने भारत व अमेरिका के बीच परमाणु करार को अंजाम पर पहुंचाने सबसे अहम भूमिका निभाई थी। विदेश सचिव के तौर पहले उन्होंने पीएम के साथ मिल कर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता शुरु करने की कवायद की लेकिन पठानकोट हमले के बाद कठोर कदम उठाने का सुझाव भी दिया। जनवरी, 2018 में पदमुक्त होने के बाद उन्होंने निजी क्षेत्र की टाटा समूह को ज्वाइन किया था।

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