नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। वर्ल्‍ड यूथ स्किल डे के मौके पर दिया गया पीएम मोदी का संबोधन बेहद खास था। खास सिर्फ इसलिए था क्‍योंकि आज पीएम मोदी के महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक स्किल इंडिया मिशन को पांच वर्ष पूरे हो गए, बल्कि इसलिए भी था क्‍योंकि इसमें उन्‍होंने अपने पुराने दिनों का वो किस्‍सा सुनाया जो बेहद दिलचस्‍प था। इसका आयोजन स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय की तरफ से डिजिटल कॉन्क्लेव द्वारा किया गया था। दरअसल, स्किल इंडिया, मोदी सरकार द्वारा देश के युवाओं की स्किल को बढ़ाने के अलावा उन्हें सशक्त बनाने की एक बडी पहल है। इसके जरिए युवाओं के स्किल का विकास किया जाता है, ताकि वो अधिक रोजगारपरक और अधिक उत्पादक बन सके। स्किल इंडिया मुहिम के जरिए लोगों की तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ाया जाता है। अपने संबोधन में उन्‍होंने 21वीं सदी के युवाओं की स्किल को सबसे बड़ी ताकत बताया है। उन्‍होंने ये भी कहा कि वर्तमान में दुनिया के सामने आए कोरोना संकट ने नेचर ऑफ जॉब को भी बदलकर रख दिया है। इसकी वजह से तकनीक भी प्रभावित हुई है। यही वजह है कि वर्तमान में देश का युवा नई-नई स्किलको तेजी से अपना रहे हैं।

एक घटना का जिक्र

इस मौके पर पीएम मोदी ने खुद से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया। उन्‍होंने कहा कि युवावस्था में ट्राइबल बेल्‍ट में एक वोलेंटियर के रूप में जब वे काम करते थे तो उन्‍हें कुछ संस्थाओं के साथ मिलकर काम लेना होता था। एक बार, एक संस्था के साथ, उनके लोगों के साथ कहीं बाहर जाना था, तो सब उनकी जीप में ही जाने वाले थे। जीप से सभी को सुबह ही निकलना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जंगल में जीप खराब हो गई। उसको कई बार धक्‍का लगाकर चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। शाम हो गई थी तब मैकेनिक को बुलाया गया। इसमें शाम के 7-8 बज गए। मैकेनिक ने दो ही मिनट में गाड़ी ठीक कर दी। जब उससे पूछा गया कि कितने पैसे हुए तो उसने कहा बीस रुपये। इस पर उनके एक साथी ने कहा कि दो मिनट के काम के 20 रुपये। उस वक्‍त 20 रुपये भी काफी होते थे। उस वक्‍त उस अनपढ़ मैकेनिक ने कहा, साहब मैं 2 मिनट का 20 रुपये नहीं ले रहा, 20 साल से काम करते-करते मैंने, जो सीखा है और जो अनुभव जुटाया है उसके 20 रुपये मांग रहा हूं।

कैसे रहे रेलिवेंट

उन्‍होंने कहा कि बदलते समय में बाजारों के बदलने पर खुद को रेलिवेंट रखने का जरिया भी एकमात्र Skill, Re- Skill और Upskill है। स्किल हमारी क्षमता है, रि-स्किल कुछ नया सीखते रहने है और अपस्किल इसका विस्‍तार करना है। इस मौके पर उन्‍होंने उन लोगों का जिक्र भी किया जिन्‍होंने अपनी राइटिंग स्किल को अपनी रोजी-रोटी का माध्‍यम बनाया। इसलिए अपनी स्किल बढ़ाने का कोई भी मौका जाने ना दे। हर वक्‍त मौका तलाशते रहना चाहिए। यदि कुछ चीज को सीखने के प्रति आकर्षण समाप्‍त हो जाता है तो जीवन ठहर जाता है। ऐसे में अपनी ही पहचान बोझ बन जाती है। स्किल सिर्फ रोजी- रोटी और पैसे कमाने का जरिया नहीं है। जिंदगी में उमंग, उत्साह और जीने की जिद चाहिए तभी हमारी स्किल हमारे लिए नई प्रेरणा लेकर आती है।

स्किल्ड मैप

पीएम मोदी ने कहा कि पांच वर्ष पहले आज के ही दिन Skill India Mission इसी सोच के साथ शुरू किया गया था। इसका मकसद यही था कि युवाओं को जानकारी के साथ उनकी स्किल भी बढ़ाई जाए। इसके लिए देशभर में सैकड़ों प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोले गए। आईटीआई की संख्या बढ़ाई गई। साथ ही उसमें छात्रों की संख्‍या भी बढ़ाई गई। बीते पांच वर्षों के दौरान 5 करोड़ से ज्यादा लोगों का स्किल डेवलेपमेंट किया जा चुका है। आज की दुनिया में अनेक सेक्टरों में लाखों स्किल्‍ड लोगों की जरूरत है। विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं में तो बहुत बड़ी संभावनाएं बन रही हैं। यही समझते हुए अब कौशल विकास मंत्रालय ने दुनिया भर में बन रहे इन अवसरों की मैपिंग शुरू की है। मैपिंग की वजह से अब इस तरह की जानकारियां देने का काम और आसान हो जाएगा। उनके मुताबिक कुछ दिन पहले देश में श्रमिकों की स्किल मैपिंग का एक पोर्टल भी शुरू कर दिया गया है। इससे नियोक्‍ता एक क्लिक पर स्किल्ड मैप वाले वर्कर्स तक पहुंच पाएंगे।

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