नीलू रंजन, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि धर्म क्षेत्र ट्रस्ट को विवादों से बचने और शांतिपूवर्क मंदिर निर्माण का काम पूरा करने का सुझाव दिया है। गुरुवार को ट्रस्ट के सदस्यों ने मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को अयोध्या आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया, लेकिन अभी तक इसकी कोई तारीख तय नहीं हुई है। वहीं ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के पहले रामलला को मौजूदा टेंट से हटाकर दूसरी जगह विराजमान करने का फैसला किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के बारे में बताते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ट्रस्ट को ऐसी बातें नहीं बोलने का सुझाव दिया है जो समाज में खटास पैदा करे। उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने साफ किया कि यह समाज में कड़वाहट और खटास पैदा करने का समय नहीं है और ऐसी भाषा का उपयोग किया जाना चाहिए जिससे किसी का दिल न टूटे। प्रधानमंत्री के अयोध्या आने के बारे में पूछे जाने पर चंपत राय ने कहा कि अभी कुछ तय नहीं है। ट्रस्ट की ओर से अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने अनौपचारिक रूप से पीएम को अयोध्या आने का निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। लेकिन अभी तक कोई कार्यक्रम या तारीख तय नहीं है।

चंपत राय के अनुसार ट्रस्ट के सदस्य इस मुद्दे पर एकमत हैं कि मंदिर निर्माण से पहले रामलला को टेंट से हटाकर 67 एकड़ की ट्रस्ट की जमीन में ही दूसरी जगह विराजमान किया जाए। यह काम दो अप्रैल को रामनवमी के पहले पूरा करने का उद्देश्य है। नई जगह स्थायी जरूर होगी, लेकिन उसे भव्य बनाया जाएगा। जिसमें सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाएगा। रामलला के नए अस्थायी निवास की रूपरेखा तय करने के लिए ट्रस्ट के सदस्य व तीर्थ क्षेत्र के विकास व प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या जाएंगे।

शायद अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर परिसर में दानदाताओं के नाम की पट्टिकाओं की कोई जगह नहीं होगी। कई लोगों द्वारा करोड़ों रुपये के दान की घोषणाओं के बारे में पूछे जाने पर चंपत राय ने कहा, 'देने वाला घोषणा क्यों कर रहा है। घोषणा के पीछे दान की वृति है या नाम की वृति है। मेरा नाम छपे यह महत्वपूर्ण है या भगवान का काम जल्दी संपन्न हो यह महत्वपूर्ण है। घोषणा करने वाले खुद सोचें।'

अब कोई शिलान्यास नहीं, केवल भूमिपूजन 

चंपत राय ने यह भी साफ कर दिया कि मंदिर निर्माण के लिए नए सिरे से शिलान्यास नहीं होगा। 1989 में कामेश्वर चौपाल के हाथों इसका शिलान्यास हो चुका है। चूंकि शिलान्यास के बाद 31 साल का फासला हो चुका है इसीलिए मंदिर निर्माण का काम भूमि पूजन के साथ शुरू किया जाएगा। चंपत राय ने साफ कर दिया कि भूमि पूजन का कार्यक्रम भी दो अप्रैल को रामनवमी के दिन नहीं होगा। दो अप्रैल की तारीख को अव्यवहारिक बताते हुए उन्होंने कहा कि रामनवमी के दिन अयोध्या में वर्षो से 15-20 लाख श्रद्धालु आते हैं। उनके अनुसार ट्रस्ट की अगली बैठक में भूमि पूजन की तारीख तय की जा सकती है।

प्रस्तावित राम मंदिर के नक्शे में कोई बदलाव नहीं 

चंपत राय यह भी संकेत दिया कि विश्व हिंदू परिषद द्वारा प्रस्तावित राम मंदिर के नक्शे में कोई बदलाव नहीं आएगा। उनके अनुसार सभी साधु-संत पुराने नक्शे के आधार पर मंदिर निर्माण के पक्ष में हैं, लेकिन इस पर अभी ट्रस्ट की मुहर लगनी बाकी है। पुराने नक्शे के अनुसार मंदिर निर्माण का काम दो-तीन साल में पूरा हो जाएगा क्योंकि इसके लिए 70 फीसद पत्थर तराशने का काम पूरा हो चुका है।

जीतेगा भारत हारेगा कोरोन

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस