नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र के दस देशों के संगठन आसियान के साथ भारत अपने रिश्तों को प्रगाढ़ करने की कोशिश तो कर रहा है लेकिन इसकी दिशा किसी खास तरफ जाती हुई नहीं दिखाई दे रही है। गुरुवार को भारत-आसियान शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से आसियान देशों को यह कहते हुए आश्वस्त किया गया कि उसकी हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर नीति इन देशों के हितों को केंद्र में रख कर ही बनेगी। लेकिन दोनों तरफ मौजूदा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में बदलाव को लेकर कोई खास रुचि नहीं दिखाई गई।

कोरोना काल के सहयोग से प्रगाढ़ होंगे भारत-आशियान संबंध

हालांकि पीएम ने कोरोना काल में दोनों तरफ से किए गए सहयोग से भविष्य में भारत-आशियान देशों के बीच संबंध प्रगाढ़ होने की उम्मीद जताई है। भारत ने जब से ट्रेड समझौते क्षेत्रीय समग्र समझौते (आर-सेप) से अलग होने का फैसला किया है तभी से आसियान देशों के साथ रिश्तों की गति कुछ सुस्त है। गुरुवार को पीएम मोदी ने ब्रूनेई के सुल्तान हाजी हसनल बोलकिया के साथ संयुक्त रूप से बैठक की अध्यक्षता की।

वर्ष 2022 को भारत-आसियान फ्रेंडशिप वर्ष के तौर पर मनाने का फैसला किया है। पीएम मोदी ने कोरोना काल के दौरान दोनों तरफ से एक दूसरे को दी गई मदद को याद किया और बताया कि म्यांमार के लिए भारत ने दो लाख डालर की मानवीय मदद दी है। साथ ही आसियान को कोविड से लड़ाई के लिए सृजित फंड में दस लाख डालर की भी मदद दी है।

दोनों पक्षों के बीच सभी तरह की कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए भी विकल्पों पर विचार हुआ लेकिन किसी नई ठोस योजना के बारे में कोई घोषणा नहीं हुई है। आसियान देशों के साथ सांस्कृतिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने के लिए पीएम मोदी ने आसियान कल्चरल हेरिटेज लिस्ट को भी बढ़ाने का एलान किया है। आसियान देशों की तरफ से भी कोरोना की लड़ाई में मदद के लिए भारतीय पीएम को धन्यवाद दिया गया।

दक्षिणी चीन सागर के बारे में भी बातचीत हुई। दोनों तरफ से इस समूचे क्षेत्र को सभी के लिए खुला और समान अवसर वाला बनाने की पारंपरिक भावना को व्यक्त किया गया। दोनों पक्षों ने कहा है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए।

Edited By: Arun Kumar Singh