संजय मिश्र, नई दिल्ली। देश के 76वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के चक्र पर चिंता जाहिर करते हुए इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई की हुंकार भरी है। देश को खोखला बना रही इन दोहरी चुनौतियों का आजादी के अमृतकाल के दौरान समूल अंत कर पारदर्शी और समावेशी व्यवस्था के नए दौर की शुरूआत का संकल्प जताया। भ्रष्टाचार के प्रति जहां नफरत का भाव पैदा करने और हर क्षेत्र में भाई- भतीजावाद के चलते प्रतिभाओं के साथ होने वाले अन्याय को लेकर जागरूकता पर जोर दिया। सियासत में भाई-भतीजावाद पर प्रहार करते हुए कहा कि परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है उसका देश की भलाई से कोई लेना-देना नहीं।

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता के 75 साल पूरा होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर अमृतकाल के लिए पंच प्रण की घोषणा की और कहा कि देश अब भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के बड़े संकल्प लेकर चलेगा, मन के किसी कोने में गुलामी का अंश नहीं बचेगा, विरासत पर गर्व करेंगे, एकता और एकजुटता के साथ नागरिकों को कर्तव्य का बोध कराएंगे।

तिरंगा ध्वजारोहण के बाद राष्ट्र को संबोधन में प्रधानमंत्री ने सबसे पहले महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर, सुभाषचंद्र बोस समेत जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल व अन्य का नाम लेते हुए उनके योगदान को नमन किया। उनका संबोधन मुख्यत: उन बिंदुओ पर था जिसके सहारे देश को आगे बढ़ना है। इसी क्रम में उन्होंने पंच प्रण का भी उल्लेख किया।

संबोधन के आखिरी चरण में उन्होंने अपने मन की पीड़ा गिनाई और कहा कि समस्याएं कईं है लेकिन फिलहाल सिर्फ भ्रष्टाचार और परिवारवाद का उल्लेख करना चाहते हैं जो देश को दीमक की तरह चाट रहे हैं। समय रहते न चेता गया तो अमृतकाल के अगले 25 साल में ये दोनों चुनौती विकराल रूप ले सकते हैं।

पीएम ने कहा - देश में जहां लोग गरीबी से जूझ रहे हैं और रहने की जगह नहीं है उसमें ऐसे लोग भी हैं जिन्हें अपना चोरी किया माल रखने के लिए जगह नहीं है और यह स्थिति अच्छी नहीं है। इसलिए हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ना है। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से पिछले आठ वर्षों में दो लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचाकर लोगों की भलाई में लगाए हैं।

पिछली सरकारों में बैंकों को लूट-लूट कर भागे लोगों की संपत्तियां जब्त कर वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। कईयों को जेलों में जीने के लिए मजबूर कर रखा है। कोशिश है जिन्होंने देश को लूटा है उनको लौटना पड़े वो स्थिति हम पैदा करेंगे।

प्रधानमंत्री ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि 'भ्रष्टाचार के खिलाफ हम एक निर्णायक कालखंड में कदम रख रहे हैं और बड़े-बड़े भी बच नहीं पाएंगे। देशवासियों से समर्थन मांगते हुए कहा कि यह चिंता का विषय है कि आज देश में भ्रष्टाचार के प्रति नफरत तो दिखती है लेकिन कभी-कभी भ्रष्टाचारियों के प्रति उदारता बरती जाती है। हमें आपसे इस लड़ाई में मदद चाहिए।'

किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा- 'लोग तो इतनी बेशर्मी तक चले जाते हैं कि कोर्ट में भ्रष्टाचारी साबित होने और जेल जाने की सजा के बावजूद भी उनका महिमामंडन करते हैं। इसलिए जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता है, सामाजिक रूप से उसको नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक यह मानसिकता खत्म होने वाली नहीं है।'

सिर पर तिरंगा से अंकित सफेद साफ बांधे पीएम मोदी ने अपने 83 मिनट लंबे संबोधन के दौरान भाई-भतीजावाद परिवारवाद पर जमकर प्रहार करते हुए कहा इसके चलते देश की प्रतिभाओं का नुकसान होता है और परिवारवाद भाई-भतीजे के चलते वे बाहर रह जाते हैं। इसलिए हमे हर क्षेत्र और संस्था में परिवारवाद व भाई-भतीजावाद को लेकर नफरत और जागरूकता पैदा करनी होगी, तभी हम अपनी संस्थाओं को बचा पाएंगे।

राजनीति में परिवारवाद पर हल्ला बोलने के अंदाज में पीएम ने कहा कि इसने देश के साम‌र्थ्य के साथ सबसे ज्यादा अन्याय किया है। इसलिए लालकिले की प्राचीर से संविधान का स्मरण करते हुए देशवासियों को खुले मन से कहना चाहते हैं कि राजनीति की सभी संस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए इस परिवारवादी मानसिकता से मुक्ति दिला योग्यता के आधार पर देश को आगे ले जाने की ओर बढ़ना होगा।

पीएम ने देश के युवाओं से विशेष रुप से भाई-भतीजावाद और परिवारवादी राजनीति के खिलाफ लड़ाई में उनका साथ मांगा। खेल संगठनों में भाई भतीजावाद की गांठ ढ़ीली होने के बाद विश्व स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को पीएम ने इसका नतीजा बताया।

इस मौके पर पीएम ने अगले 25 साल के लिए पंच प्रण संकल्पों पर देश की शक्ति को केंद्रित करने का रोडमैप दिया। पीएम ने कहा कि पहला प्रण है कि अब देश बड़े संकल्प लेकर ही चलेगा और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत, अब उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए। दूसरा प्रण है किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर, हमारी आदतों के भीतर गुलामी का एक भी अंश किसी भी हालत में बचने नहीं देना है। हमें गुलामी की छोटी से छोटी चीज भी कहीं नजर आती है उससे मुक्ति पानी ही होगी। तीसरा प्रण यह है कि हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए क्योंकि यही विरासत है जिसने कभी भारत को स्वर्णिम काल दिया था।

चौथा प्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है और वो है एकता और एकजुटता। 130 करोड़ देशवासियों में एकता, न कोई अपना न कोई पराया, एकता की ताकत, 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के सपनों के लिए हमारा चौथा प्रण है। पांचवां प्रण है नागरिकों का कर्तव्य जिससे प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री भी बाहर नहीं होता। आने वाले 25 साल के सपनों को पूरा करने के लिए एक बहुत बड़ी प्रण शक्ति है।

पीएम ने हर घर तिरंगा अभियान को अभूतपूर्व बताते हुए जनभागीदारी का उत्सव बताया और कहा कि हमारे यहां एक ही मापदंड हो, इंडिया फ‌र्स्ट और हमारी सोच, बोलचाल और काम सब इंडिया फ‌र्स्ट के अनुकुल हो। लालकिले पर पहली बार स्वदेशी तोप से तिरंगे को दी गई सलामी पर प्रसन्नता का इजहार करते हुए पीएम ने कहा कि इसकी आवाज नई प्रेरणा और ताकत देगी।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan