संजय मिश्र, नई दिल्ली। अधिकतर राज्यों का रुख साफ है कि लॉकडाउन बढ़ना चाहिए, केंद्र सख्ती से लॉकडाउन लागू करने को जरूरी मान रहा है, जबकि राजनीतिक दलों ने इसका फैसला केंद्र पर छोड़ दिया है। स्पष्ट है कि 14 अप्रैल को एकसाथ लॉकडाउन खत्म नहीं होगा। बल्कि कुछ इलाकों में ज्यादा सख्ती से लागू होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक में मौजूदा संकट को सामाजिक आपातकाल जैसी स्थिति बताते हुए कठोर फैसले को वक्त की जरूरत बताया। उन्होंने यह भी साफ किया कि कोरोना के पूर्व और बाद की स्थिति एक समान नहीं रहेगी। यह बड़ा संकट है और पूरे देश को एकजुट होकर इससे लड़ना पड़ेगा। वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए संसद के फ्लोर लीडर्स की बैठक में कांग्रेस समेत तमाम दलों ने भी लॉकडाउन बढ़ाने की पैरोकारी करते हुए प्रधानमंत्री को इस मुददे पर एक तरह से ब्लैंक चेक देकर राजनीतिक विवाद की गुंजाइश का रास्ता भी बंद कर दिया है।

सभी पार्टियों में दिखी अदभुत एकजुटता

सभी पार्टियों में दिखी अदभुत एकजुटता पर प्रधानमंत्री ने भी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि यह हमारे लोकतंत्र के रचनात्मक और सकारात्मक राजनीति को दर्शाती है। संसद के दोनों सदनों के सभी पार्टियों के नेताओं के साथ करीब पौने चार घंटे तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक के आखिर में अपनी बात रखते हुए पीएम मोदी ने लॉकडाउन को बढ़ाने का संकेत दिया। माना जा रहा है कि यह विस्तार डेड़ से दो सप्ताह का हो सकता है।

दुनिया कोविड -19 की गंभीर चुनौती का कर रही सामना

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया कोविड -19 की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है और यह मानव इतिहास में एक युगांतकारी घटना है। संसाधनों की कमी के बावजूद भारत उन कुछ चुनिंदा देशों में से एक है जहां हमने कोरोना के फैलाव की गति को अब तक नियंत्रण में रखा है। प्रधानमंत्री ने इस लड़ाई में केंद्र के साथ मिलकर काम करने वाली राज्य सरकारों के प्रयासों की भी सराहना की।

कांग्रेस ने कहा- यहां सरकार औऱ विपक्ष की कोई लड़ाई नहीं

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने सबसे पहले अपनी बात रखते हुए कहा कि लॉकडाउन से कोरोना को नियंत्रित करने में सफलता मिलती दिख रही है और सरकार इसे बढ़ाना चाहती है तो राज्यों से मशविरा कर उचित फैसला ले। कांग्रेस इस फैसले के साथ रहेगी मगर इस बात का जरूर ख्याल रखा जाए कि लॉकडाउन में किसानों व मजदूरों को और मुसीबत न हो। आजाद ने कोरोना टेस्ट की संख्या बढ़ाने, पीपीई और अन्य उपकरण चिकित्साकर्मियों को पर्याप्त संख्या में मुहैया कराने से लेकर राज्यों के लंबित पैसे को तत्काल रिलिज करने की बात उठाई। गुलाम नबी आजाद ने यह भी कहा कि यहां सरकार और विपक्ष की कोई लड़ाई नहीं बल्कि महामारी के खिलाफ हम सब की साझा लड़ाई है।

सर्वदलीय बैठक में सांसदों ने दिए सुझाव

द्रमुक के टीआर बालू, सीपीएम के इ करीम और तूणमूल कांग्रेस के सुदीप बंधोपाध्याय ने भी कोरोना से लड़ने के लिए जीएसटी की राज्यों की लंबित रकम तत्काल देने की मांग उठाई। इन पार्टियों ने यह भी कहा कि सांसद निधि को अगर सरकार दो साल तक स्थगित रखना चाहती है तो यह सुनिश्चित किया जाए कि एक राज्य के सभी सांसदों की एमपीलैड की राशि उसी राज्य को मिले। बीजेडी के पिनाकी मिश्रा ने कोरोना से गहराए आर्थिक संकट को देखते हुए सरकार से गरीब, मजदूर, वेतनभोगी लेकर उद्वोग सभी क्षेत्रों के लिए बड़े पैकेज की तत्काल जरूरत बताई और कहा कि सरकार का अभी तक करीब दो लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज पर्याप्त नहीं है। लोजपा नेता चिराग पासवान ने लॉकडाउन को चरणबद्व तरीके से खत्म करने और कुछ समय के लिए अंतर्राज्यीय परिवहन को इजाजत नहीं देने का सुझाव दिया।

कई राज्यों ने की थी लॉकडाउन बढ़ाने की अपील 

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लॉकडाउन बढ़ाने का आग्रह किया था । माना जा रहा है कि अब पीएम मोदी देश के सीएम के साथ एक अन्य बैठक के बाद के बाद लॉकडाउन पर कोई फैसला ले सकते हैं। 

यूपी के 15 जिले सील

लॉकडाउन के बीच एक बड़ी खबर यूपी से भी आ रही है। यूपी सरकार राज्य के 15 जिलों को सील करेगी। इस दौरान इन जिलों में सिर्फ होम डिलीवरी और मेडिकल टीमों को ही आवाजाही की अनुमति मिलेगी। राज्य के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया कि यूपी सरकार की तरफ से ये फैसला कम्यूनिटी स्प्रेड को रोकने के लिए लिया गया है।

जिन जिलों के लिए ये फैसला लिया गया है, वो हैं- लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी,शामली, मेरठ, बरेली, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, महाराजगंज, सीतापुर, सहारनपुर. इन शहरों में कोरोना के ज्यादा पॉजिटिव केस आए हैं। जिसमें ज्यादा मामले नोएडा से हैं।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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