जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना से निपटने के लिए लॉकडाउन और प्रधानमंत्री के संबोधनों की आलोचना कर रहे विपक्षी दलों से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चर्चा करेंगे। आठ अप्रैल को वह वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये उन सभी दलों के नेताओं से बात करेंगे जिनकी संसद में कम से कम संख्या पांच है। जाहिर है कि विपक्षी नेताओं से चर्चा के जरिये राजनीतिक एकजुटता दर्शाने की कोशिश होगी।

यूं तो सभी राज्य केंद्र के साथ ताल से ताल मिलाकर कोरोना से जंग कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस समेत कुछ दल लॉकडाउन की आलोचना भी कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने देश की एकजुटता के लिए गरीबों के नाम हर किसी से एक दिया जलाने का आह्वान किया तो विपक्षी दलों की ओर से घोर विरोध हुआ। कुछ ने इसका उपहास भी उड़ाया। ऐसे में आठ अप्रैल की सुबह 11 बजे होने वाली चर्चा का खास महत्व है।

प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता होंगे आमने-सामने

दरअसल, यह वह अवसर होगा जब प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता आमने-सामने होंगे। प्रधानमंत्री सभी राज्यों के साथ समन्वय के लिए दो बार मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर चुके हैं। पिछले तीन-चार दिनों में कोरोना संक्रमितों की संख्या जरूर तेजी से बढ़ी है, लेकिन भारत अभी भी दूसरे कई देशों से बेहतर स्थिति में दिख रहा है और इसका एक बड़ा कारण लॉकडाउन को माना जा रहा है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह चर्चा लॉकडाउन की अंतिम तिथि 14 अप्रैल से एक सप्ताह पहले होगी और तब तक कई स्थितियां साफ हो सकती हैं। वहीं, विपक्षी नेताओं की ओर से लॉकडाउन अवधि बढ़ाने आदि पर सवाल पूछे जा सकते हैं।

संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद पटेल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सिर्फ उन्हीं दलों के फ्लोर नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया गया है जिनकी संख्या कम से कम पांच है। नियमानुसार उसी पार्टी को संसद में दल की संज्ञा मिलती है जिनके दोनों सदनों में मिलाकर कम से कम पांच सदस्य हों।

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