जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत में नागरिकता को लेकर छिड़ी बहस पर अब तक चुप्पी साधे केंद्रीय उपभोक्ता व खाद्य मंत्री रामविलास पासवान भी कूद गये। इसका विरोध करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए पासवान ने कहा 'यहां किसी की नागरिकता जाना तो दूर किसी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है।' उन्होंने कहा 'भारत एक बगीचा है। इसमें हर तरह के फूल हैं। यहां किसी के अधिकार में कटौती करना संभव नहीं है।

सीएए में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे किसी की नागरिकता प्रभावित होती हो

एनपीआर पर संदेह जताने वालों को दो टूक जवाब देने के अंदाज में पासवान ने कहा कि देश में जनगणना वर्ष 1887 से हो रही है, जो हर 10 साल पर की जाती है। इसमें नागरिक होने का प्रमाण नहीं मांगा जाता है। इसमें सिर्फ परिवार के सदस्यों की संख्या और अन्य विवरण का ब्यौरा संकलित होता है। पासवान ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे किसी की नागरिकता प्रभावित होती हो।

विपक्षी दल जानबूझकर राजनीतिक विरोध कर रहे हैं, जो लोकतंत्र में उचित नहीं

पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बयानों का जिक्र करते हुए उनकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एवं वंचित वर्ग के लोगों के बीच भी भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ है, जबकि राज्यसभा में राजग का बहुमत नहीं है। इससे साफ है कि संप्रग के लोगों ने भी इसका समर्थन किया है। विपक्षी दल जानबूझकर राजनीतिक वजहों से इसका विरोध कर रहे हैं, जो लोकतंत्र में उचित नहीं है।

एनआरसी पर विपक्ष के फैलाये जा रहे भ्रम से लोगों को बचना चाहिए

एनआरसी पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों पर सबको यकीन करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा है कि फिलहाल इसकी कोई चर्चा नहीं है। जब कभी इस फैसला लेना होगा तो सभी पक्षकारों से विस्तृत चर्चा की जाएगी। पासवान ने कहा कि इसलिए विपक्ष के फैलाये जा रहे भ्रम से लोगों को बचना चाहिए।

Posted By: Bhupendra Singh

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