जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दलितों -पिछड़ों के हितों की लड़ाई में जहां अक्सर केवल पिछड़े वर्ग के नेताओं का ही उल्लेख होता रहा है, केंद्रीय खाद्य मंत्री राम विलास पासवान का मानना है कि सामाजिक न्याय की लड़ाई में अगड़े वर्ग के नेताओं की भूमिका शुरू से अहम रही है। पिछले दिनों लोकसभा और विधानसभाओं में एससी एसटी के लिए आरक्षण दस साल बढ़ाने के संविधान संशोधन पर चर्चा में पासवान ने भगवान बुद्ध से लेकर विवेकानंद और नीचे वीपी सिंह तक का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय का कभी विरोध नहीं हुआ है।

दूसरी जाति के हितों का संरक्षण

एक तरफ जहां अगड़ी जाति के नेताओं ने पिछड़ों और दलितों को आगे बढ़ाया वहीं अति पिछड़ी जाति से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससी-एसटी हितों का संरक्षण करते हुए अगड़ी जाति के गरीब परिवारों के लिए दस फीसद आरक्षण लागू किया है। सच्चे अर्थो में यही सामाजिक समरसता है।

गैर-कांग्रेस काल में बाबा आंबेडकर की पूछ अधिक हुई- पासवान

संसद के शीतकालीन सत्र में जहां दोनों सदनों ने यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ वहीं दोनों पक्षों में आरोप प्रत्यारोप भी कम नहीं हुए, लेकिन पासवान ने राज्यसभा में बहुत सधे हुए तरीके से यह याद दिलाया कि इसमें सबका योगदान रहा है। हालांकि परोक्ष रूप से इसका संकेत भी दिया कि बाबा आंबेडकर की पूछ गैर कांग्रेस काल में ही ज्यादा हुआ।

एससी-एसटी को बढ़ावा देने में हर वर्ग का रहा साथ

उन्होंने कहा कि डा भीमराव आंबेडकर प्रणेता हैं। उनके अलावा भी महात्मा फुले, पेरियार आदि का योगदान रहा है, लेकिन 1969 में जब वह पहली बार विधायक बने थे तो पार्टी में कर्पूरी ठाकुर को छोड़कर बाकी सभी नेता डा लोहिया, मधु लिमये, मामा बालेश्वर, राज नारायण आदि सभी उंची जाति के थे। उन्होंने सबको बढ़ाया।

संसद के सेंट्रल हाल में आंबेडकर की तस्वीर वीपी सिंह ने लगवाई

पासवान ने कहा कि 1990 में मंडल कमीशन तब लागू हुआ जब वीपी सिंह प्रधानमंत्री थे। उस समय पासवान श्रम मंत्री थे और तब तक संसद के सेंट्रल हाल में आंबेडकर की तस्वीर नहीं थी। पासवान ने कहा- 1977 में जब मैं पहली बार जीतकर आया था तो यह मुद्दा उठाया था और सरकार की ओर से कहा गया था कि सेंट्रल हाल में जगह नहीं है। यह जगह तब मिली जब 1990 में वीपी सिंह की सरकार बनी।

पीएम मोदी ने आंबेडकर से जुड़े स्थानों को यादगार बना दिया

इसी तरह पासवान ने यह भी याद दिलाया कि मोदी के शासन में आंबेडकर से जुड़े स्थानों को यादगार बना दिया। महू जहां उनका जन्म हुआ था वहां शानदार स्मारक बना दिया। 26 अलीपुर रोड जहां वह रहते थे वहां म्यूजियम बना दिया। अमेरिका और इंगलैंड में जहां उन्होंने पढ़ाई की थी वहां उनके मकान को खरीदकर स्मारक बनाया। मोदी काल में आंबेडकर की यादों को संजोया गया है।

सामाजिक बदलाव के लिए चार क्रांतियों में हर किसी का योगदान चाहिए

पासवान ने कहा कि चार क्रांतियां हैं। सांस्कृतिक क्रांति, सामाजिक क्रांति, आर्थिक क्रांति और राजनीतिक क्रांति। सामाजिक क्रांति को हमने हासिल कर लिया है और अब तीन को हासिल करना बाकी है। इसमें हर किसी का योगदान चाहिए होगा।

Posted By: Bhupendra Singh

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