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नई दिल्ली, सुरेंद्र प्रसाद सिंह। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने भारतीय खाद्य निगम के कामकाज पर सख्त नाराजगी जताई है। खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए साइलोज निर्माण की धीमी गति की जांच कराने का आदेश दिया है।

इसके लिए एफसीआइ के प्रबंध निदेशक को तीन सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। एक करोड़ टन भंडारण क्षमता वाले साइलोज बनाने का लक्ष्य के मुकाबले केवल 6.7 लाख टन वाले साइलोज (आधुनिक गोदाम) का निर्माण हो पाया है। पासवान ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करते हुए एफसीआइ के कामकाज की समीक्षा की।

उन्होंने खाद्य प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त करने की कारगर पहल की है। इसके तहत राज्यों के साथ विचार-विमर्श शुरू करने का फैसला किया है। इसके लिए पहले खाद्य सचिवों और फिर प्रदेशों के खाद्य मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें खाद्यान्न की सरकारी खरीद, भंडारण, निकासी, राशन प्रणाली और पूरे बंदोबस्त में पारदर्शिता लाने जैसे विषय पर सभी के साथ गुफ्तगू होगी।

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि देश में खाद्यान्न प्रबंधन को राज्यों के साथ मिलकर ही पुख्ता बनाया जा सकता है। इसके लिए उनकी राय लेना जरूरी है। उन्होंने बताया कि 27 जून को राजधानी दिल्ली में सभी राज्यों के खाद्य सचिवों को बुलाया जाएगा, जबकि जुलाई के दूसरे सप्ताह में खाद्य मंत्रियों को आमंत्रित किया जाएगा।

एफसीआइ की कार्यप्रणाली पर नाखुशी जताते हुए पासवान ने कहा कि भंडारण की आधुनिक प्रणाली से देश में एक करोड़ टन भंडारण क्षमता वाले साइलोज बनाने की योजना थी, जो बहुत धीमी गति से चल रही है। अब तक सात लाख टन क्षमता वाले साइलोज बनाये जा सके हैं। जबकि 22 लाख टन क्षमता के साइलोज की कागजी खानापूरी हो रही है। साइलोज के डिजाइन में जरूरी बदलाव के लिए भी एक एजेंसी अध्ययन करेगी। इसकी भी रिपोर्ट हर हाल में 90 दिनों के भीतर आनी है। इसके बाद संशोधित नीति लागू कर दी जाएगी।

एफसीआइ को डिजिटल बनाने की दिशा में बहुत प्रगति नहीं हुई है। एफसीआइ के गोदामों और सेंट्रल वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के गोदामों को ऑनलाइन जोड़ दिया गया है। लेकिन राज्यों के साथ इनका संपर्क अभी तक नहीं हो सका है। इस पर भी पासवान ने तल्खी दिखाई। एफसीआइ में सूचना प्रौद्योगिकी का कारगर उपयोग न होने से यहां के कर्मचारियों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

 

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Posted By: Dhyanendra Singh

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