नई दिल्ली, जेएनएन। आजादी के 75 साल के बाद भी देश के बंटवारे का दर्द आज भी ताजा है। ऐसे में भारत के विभाजन के दर्द की स्मृति को याद करने के लिए देशभर में 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' की दूसरी वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है। आज से 75 साल पहले हुई विभाजन की विभीषिका को लेकर भी भाजपा और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है।

इस मौके पर बीजेपी ने एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि आखिर कब, कैसै और क्यों भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। इस सात मिनट की वीडियो में कई पुराने अभिलेखागार क्लिप, फोटो शामिल हैं, जो बंटवारे का दर्द को बयां करती है। इस वीडियो में नेहरू और जिन्ना का चेहरा प्रमुखता से दिखता है। वीडियो में कहा गया कि 1905 में भी अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन की कोशिश की थी लेकिन विरोध के कारण वह सफल नहीं हो सका। लेकिन 1947 में धार्मिक आधार पर विभाजन इसलिए सफल हुआ क्योंकि कांग्रेस नेताओं समेत जिन लोगों पर इसे रोकने की पर इसे रोकने की जिम्मेदारी थी उन्होंने ही सहमति दे दी।

वीडियो मे कहा गया- 2 जून 1947 को एक कमरे में मुस्लिम लीग पाकिस्तान की रट को सच करने की तैयारी हो रही थी। भगवान राम के बेटे लव का बसाया लाहौर, ढाकेश्वरीदेवी का तीर्थ ढाका, गुरुनानक देव का जन्मस्थान ननकाना दो हिस्सों में बंट गया। वीडियो में आगे बताया गया कि मुस्लिम लीग की ओर से पाकिस्तान की मांग इसलिए बलवती हुई क्योंकि तुर्की में खलीफा का कांग्रेस ने समर्थन किया था। इसी तरह कम्यूनिस्ट पार्टी ने भी आत्मनिर्णय की मांग की सही बताया था। हाल यह हुआ कि अंग्रेज अफसर रेडक्लिफ ने सिर्फ दो हफ्तों में भारत को दो हिस्सों में बांट दिया। डेढ़ करोड़ लोग बेघर हो गए और हजारों की जानें गईं।

भाजपा ने ट्वीट किया वीडियो

दरअसल, इस वीडियों में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वो मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग की मांगों के आगे झुक गए, जिसकी वजह से पाकिस्तान का निमार्ण हुआ। बीजेपी ने वीडियो के साथ ट्वीट करते हुए सवाल खड़ा किया कि उस समय वे लोग कहां थे जिन पर इन विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ लड़ने की जिम्मेदारी थी?'

जयराम रमेश ने किया पलटवार

इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी पलटवार किया है। कांग्रेस पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए कहा, 'आज के दिन विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने के पीछे पीएम का असली मकसद वर्तमान राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने आगे कहा, 'मॅार्डन-डे सावरकर और जिन्ना देश को बांटने के अपने प्रयास जारी रखे हुए हैं।' जयराम रमेश ने यह भी कहा कि विभाजन की त्रासदी का नफरत और पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने के लिए "दुरुपयोग" नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि इस वीडियो में सिरिल जॉन रैडक्लिफ को दिखाया गया है, जिनके विभाजन के नक्शे ने पंजाब और बंगाल को लगभग आधे हिस्से में विभाजित कर दिया, और सवाल किया कि एक व्यक्ति जिसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत का कोई ज्ञान नहीं था, उसे केवल हफ्तों में भारत को विभाजित करने की अनुमति कैसे दे दी गई।

गौरतलब है कि पिछले साल 14 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि 1947 में विभाजन के दौरान भारतीयों के कष्टों और बलिदानों की याद में हर साल 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में याद किया जाएगा।

पीएम मोदी ने आज सुबह ट्वीट करते हुए 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' को याद किया। रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विभाजन के दौरान गुजरे लोगों को याद करते हुए फिर से कहा कि'''' 1947 में हुआ देश का विभाजन भारतीय इतिहास का वह अमानवीय अध्याय है जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। विभाजन की ¨हसा और घृणा ने लाखों लोगों की जान ली। यह दिवस युवा पीढ़ी को उन लोगों की वेदना का स्मरण कराएगा और देशवासियों को शांति और सदभाव बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगा।

Edited By: Piyush Kumar