नई दिल्ली, प्रेट्र। मतदाता सूची से आधार को जोड़ने संबंधी चुनाव आयोग के प्रस्ताव को संसदीय समिति का साथ मिल गया है। विधि मंत्रालय की स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि सरकार को वोटर आइ-कार्ड से आधार को जोड़ने संबंधी प्रस्ताव पर समुचित कार्रवाई करनी चाहिए। मतदाता सूची की शुद्धता और लोकतांत्रिक राजनीति के लिए यह बेहद जरूरी है। यह सिफारिश अनुदान मांगों (वर्ष 2020-21) का एक हिस्सा है, जिसे विधि एवं कानून मंत्रालय ने शुक्रवार को संसद में रखा है।

पिछले साल अगस्त में चुनाव आयोग ने नए आवेदकों तथा मौजूदा मतदाताओं से आधार नंबर मांगने के संबंध में सरकार से कानूनी अधिकार प्रदान करने की मांग की थी। उद्देश्य है कि इसके जरिये कई जगहों पर मतदाता के रूप में दर्ज लोगों की छंटनी की जा सके। आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों में संशोधन किया जाना चाहिए, ताकि चुनाव आयोग के पास नए और मौजूदा मतदाताओं के आधार नंबर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

अगस्त 2015 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने चुनाव आयोग की उस परियोजना पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत उसने मतदाताओं के चुनावी आंकड़े को यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआइडीएआइ) से जोड़ने की कवायद शुरू की थी। तब चुनाव आयोग नेशनल इलेक्टोरल रॉल प्यूरिफिकेशन एंड ऑथेंटिकेशन प्रोग्राम (एनईआरपीएपी) के तहत आधार नंबर जुटा रहा था। यह कवायद मतदाता सूची में एक व्यक्ति की कई प्रविष्टियों को रोकने और उसे त्रुटिहीन बनाने के लिए शुरू की गई थी। उल्लेखनीय है कि विधि मंत्रालय चुनाव आयोग का नोडल मंत्रालय है।

Posted By: Nitin Arora

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