जलना, पीटीआइ। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को उनके मंगलवार को बयान के लिए घेरा। भागवत ने एक बयान में कहा था कि लिंचिंग की उत्पत्ति पश्चिमी देशों में हुई है और इसका इस्तेमाल भारत को बदनाम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा था कि लिंचिंग की उत्पत्ति पश्चिमी देशों में हुई है। इसे भारत पर नहीं थोपा जाना चाहिए। ये भारत को बदनाम करने की साजिश है। भारत छोड़ में इतनी विविधताओं के बाद भी लोग एक साथ शांति से रहते हैं। उन्होंने कहा था कि शब्द 'लिंचिंग' भारतीय लोकाचार से उत्पन्न नहीं हुआ है, बल्कि एक अलग धार्मिक पाठ से आता है।

भागवत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम, दलित और यहां तक कि हिंदू भी देश की भीड़तंत्र द्वारा रची गई घटनाओं के शिकार हुए हैं। उन्होंने पूछा, 'क्या ये घटनाएं मॉब लिंचिंग नहीं हैं'। इसके अलावा हैदराबाद के सांसद ओवैसी द्वारा मॉब लिंचिंग के अपराधियों को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे से प्रेरित बताया।

उन्होंने इस दौरान तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नई दिल्ली में हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब भी मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई थीं। ओवैसी यहां मध्य महाराष्ट्र में कल्याणराव घुगरे स्टेडियम में एआईएमआईएम उम्मीदवार इकबाल पाशा के समर्थन में एक चुनावी रैली में बोल रहे थे।

'भारत एक हिंदू राष्ट्र' वाले भागवात के बयान पर भी ओवैसी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भागवत को भारतीय लोकतंत्र और मुख्य संविधान निर्माता बी आर अंबेडकर के आदर्शों पर कोई विश्वास नहीं है, जिन्होंने समानता और न्याय की बात की थी। उन्होंने देश में किसान आत्महत्या, बेरोजगारी और मूल्य वृद्धि जैसी समस्याओं पर BJP को घेरा। वहीं इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस पर भी प्रहार करते हुए पार्टी का 'डूबते जहाज' के रूप में वर्णन किया, जिसके कप्तान (राहुल गांधी) ने इसे छोड़ दिया है।

Posted By: Nitin Arora

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