संजय मिश्र, नई दिल्ली। विपक्षी दलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुट होकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इतना ही नहीं विपक्षी पार्टियों की अगुआई कर रही कांग्रेस ने उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों के साथ सीट बंटवारे के फार्मूले को निर्णायक मुकाम पर पहुंचाने की कसरत तेज कर दी है। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करने और चुनाव बाद ही पीएम का चेहरा तय करने को लेकर भी विपक्षी पार्टियों में सहमति बन गई है।

कांग्रेस की क्षेत्रीय दलों के साथ बनी इस सियासी रणनीति का संकेत साफ है कि नेतृत्व पर दावेदारी की होड़ छोड़ते हुए विपक्ष एकजुट होकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोकेगा।

क्षेत्रीय दलों के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत निर्णायक दौर में होने की पुष्टि करते हुए कांग्रेस के शीर्षस्थ सूत्रों ने 2019 के चुनाव में विपक्षी एकजुटता को लेकर उठाए जा रहे सवालों को विराम देने का साफ संदेश दिया। उनका कहना था कि गठबंधन पर रणनीतिक सहमति बन गई है।

कांग्रेस के मुताबिक उत्तरप्रदेश में बसपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर वार्ता हो रही है और समझौता जल्द होने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस ममता बनर्जी की पार्टी से तालमेल का विकल्प खुला होने का संकेत दे रही है।

आप और टीआरएस से गठबंधन में नहीं करेंगे शामिल  

पार्टी के इस शीर्ष सूत्र ने कहा कि कांग्रेस ने विपक्षी गठबंधन में आम आदमी पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति को शामिल नहीं करने का भी फैसला कर लिया है। गठबंधन की सियासी जरूरत के बावजूद कांग्रेस अपनी राज्य इकाइयों के नजरिये की अनदेखी नहीं करेगी। दिल्ली कांग्रेस अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप और तेलंगाना इकाई चंद्रशेखर राव की टीआरएस से गठबंधन के खिलाफ है।

शिवसेना के साथ भी कांग्रेस का चुनावी गठबंधन नहीं 

उनका यह भी कहना था कि एनडीए से नाराज शिवसेना के साथ भी कांग्रेस का चुनावी गठबंधन नहीं होगा क्योंकि विचाराधारा के स्तर पर दोनों दलों का कोई मेल नहीं। कांग्रेस केवल समान विचाराधारा वाले दलों से ही तालमेल करेगी और उद्धव ठाकरे के जन्म पर राहुल गांधी के बधाई संदेश का अर्थ सियासी तालमेल नहीं।

ममता बनर्जी और मायावती की पीएम दावेदारी के बीच विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के नाते राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी को आगे बढ़ाने पर कांग्रेस की हिचक पर शीर्ष सूत्र ने कहा कि विपक्षी पार्टियों ने यह तय कर लिया है कि आपसी मतभेद का कोई संदेश जनता में न जाए।

सभी पार्टियों के नेता इस बात से सहमत हैं कि ऐसे मुद्दे जो आपसी विवाद का कारण बन नुकसान पहुंचा सकते हैं उस पर चर्चा की फिलहाल जरूरत भी नहीं है। इसीलिए पीएम का चेहरा चुनाव बाद मिल कर सभी की सहमति से होगा। विपक्षी पार्टियां सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में जाएंगी।

विपक्ष की 2019 चुनाव की दो स्तरीय रणनीति है। राज्यों में भाजपा-एनडीए के खिलाफ एकजुट विपक्ष का मुकाबले में उतरना पहला लक्ष्य है। जबकि मोदी सरकार की चुनावी वादों को पूरा करने की नाकामी के साथ विपक्ष का वैकल्पिक एजेंडा देश के सामने पेश कर जनता को उम्मीदों का नया विकल्प देना भी इसका अहम हिस्सा है। गठबंधन के नेतृत्व का फैसला चुनाव बाद दूसरे स्टेज की रणनीति का हिस्सा होगा। जाहिर तौर पर इसमें गठबंधन दलों की सीटों की संख्या के हिसाब से कांग्रेस की सबसे निर्णायक भूमिका होगी।

 

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