संजय मिश्र, नई दिल्ली। सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक पर बीजद, टीआरएस और वाइएसआर कांग्रेस के आखिर में रूख बदलने से लगे बड़े झटके के बाद विपक्षी दलों ने राज्यसभा में सरकार की घेरेबंदी के लिए आगे इन तीनों पार्टियों पर अब भरोसा नहीं करने का फैसला किया है।

इसीलिए संसद के मौजूदा सत्र के दौरान रस्साकशी की संभावना वाले बाकी बचे आधा दर्जन विधेयकों पर विपक्षी दलों ने नये सिरे से रणनीति बनाने का फैसला किया है। राज्यसभा में विपक्ष की मजबूत किलेबंदी को धराशायी करने में सरकार को मिली कामयाबी के बाद इन आधा दर्जन विधेयकों पर विपक्षी पार्टियां नई रणनीति के तहत 'मध्यमार्ग' के विकल्प पर भी गौर कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार राज्यसभा में मध्यमार्ग की इस रणनीति के तहत विपक्षी पार्टियां कुछ विधेयकों पर सरकार को गुंजाइश देने के विकल्प पर राजी हो सकती हैं। बशर्ते कुछ विधेयकों पर सरकार भी विपक्ष की बात मानने को राजी हो जाए। विपक्षी खेमे के वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि आरटीआइ पर राज्यसभा में हुई जबरदस्त जोर आजमाइश के बाद सियासी हालात बदल गए हैं।

ऐसे में विपक्ष की सूची में बाकी बचे सभी छह विधेयकों को प्रवर समिति को भेजने की रणनीति सिरे चढ़ाना मुश्किल है। सरकार ने भी विपक्षी पार्टियों से खींचतान वाले विधेयकों की सूची मांग ली है। साथ ही यह भी कहा है कि सभी विधेयकों को प्रवर समिति भेजने पर वह सहमत नहीं है। मगर दो-तीन विधेयकों को प्रवर या स्थाई समितियों को भेजने पर सरकार राजी हो सकती है।

विपक्षी सूत्रों ने कहा कि हर विधेयक पर सदन में आरटीआइ संशोधन बिल पारित कराने जैसा सियासी मंजर सरकार के लिए भी सुखद नहीं होगा। इसके मद्देनजर ही सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के लिए बीच का रास्ता निकालना ज्यादा मुफीद होगा। सरकार से मिले संकेतों के मद्देनजर ही विपक्षी दलों के नेताओं ने शुक्रवार को बाकी बचे विधेयकों पर मध्यमार्ग की रणनीति को लेकर चर्चा की। संसद के अगले दो हफ्ते इन विधेयकों पर ही चर्चा कर इन्हें पारित किया जाना है।

इसीलिए विपक्षी दलों की सोमवार को होने वाली बैठक में आधा दर्जन में से ऐसे दो-तीन विधेयकों की सूची सत्तापक्ष को सौंपा जाएगी जिन्हें विपक्ष प्रवर समिति को भेजना चाहता है। आरटीआइ संशोधन बिल पारित होने के बाद विपक्ष की सूची में तत्काल तीन तलाक बिल, वेतन संहिता विधेयक, कार्यगत सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता बिल, अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद संशोधन बिल, डीएनए संशोधन बिल और गैरकानूनी गतिविधि निषेध बिल है।

बीजद, टीआरएस और वाइएसआर कांग्रेस के आरटीआइ संशोधन बिल पर भरोसा दिए जाने के मद्देनजर विपक्ष इन सभी विधेयकों को प्रवर समिति में भेजने की लामबंदी कर रहा था। मगर इन तीनों पार्टियों के रूख बदलने के बाद विपक्ष की लामंबदी की मुहिम कमजोर पड़ गई है और इसी वजह से विपक्षी दलों को मध्यमार्गी रणनीति के रास्ते पर गौर करना पड़ रहा है।

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Posted By: Arun Kumar Singh

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