नई दिल्ली,आइएएनएस। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अयोध्या राम मंदिर को लेकर गंभीर नहीं हैं, लेकिन लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने के लिए इसका इस्तेमाल चुनावों के दौरान किया जा रहा है। बता दें कि दिसंबर 2017 तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के मामले में पेश हुए विशिष्ट वकील सिब्बल ने प्रधानमंत्री के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें आरोप लगाए गए थे कि कांग्रेस के वकील दो दशकों से चले आ रहे इस मामले को टालना का काम कर रहे है।

सिब्बल ने राम मंदिर पर मोदी और भाजपा पर निशाना साधते हुए समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, 'वे दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। वे फिर से लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। यह एक और 'जुमला' (नौटंकी) है। (वे) लोगों की भावनाओं का शोषण कर रहे हैं।' उन्होंने कहा मोदी के लिए मंदिर का मुद्दा विश्वास का विषय नहीं है क्योंकि अगर यह विश्वास की बात होती तो उन्होंने इसे बहुत पहले उठाया होता। 2014 में मोदी देश के प्रधानमत्री बने वो तब और उससे पहले भी इसके लिए पहल कर सकते थे।

उन्होंने आगे कहा कि मोदी कभी भी इसे लेकर गंभीर नहीं थे। वे राम मंदिर को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। अगर वो इसे लेकर चिंतित थे तो 2014,15,16 या 2017 में उन्होंने यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया?

कांग्रेस नेता ने भाजपा से सवाल पूछते हुए कहा कि पार्टी 'राम मंदिर' के बारे में भूल गई और चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे को भुनाना चाहती है। क्यों? क्योंकि वे हमेशा इसका उपयोग करना चाहती हैं। यह वादा उन्होंने पिछले 30 वर्षों से देश से किया है। लेकिन वे अभी भी इसे पूरा नहीं कर पाई हैं।

सिब्बल से जब पूछा गया कि आखिर क्यों भाजपा अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने के अपने वादे को पूरा नहीं कर रही है? तो इस पर उन्होंने कहा, 'क्योंकि वे इसके बारे में गंभीर नहीं हैं। वे इस मामले को चुनाव में इस्तेमाल करने के लिए हमेशा जीवित रखना चाहते हैं।

बता दें कि 8 मार्च को, सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में अदालत-निगरानी मध्यस्थता का आदेश दिया ताकि इस मुद्दे का 'परमानेंट समाधान' हो सके। पीठ ने तीन मध्यस्थों की एक समिति नियुक्त की, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एफ.एम. कलीफुल्ला को सौंपी गई।

प्रधानमंत्री मोदी के आरोपों पर जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कैसे? ... वह कैसे कह सकता है यह, कुछ आधार होना चाहिए'। बता दें कि आरोप लगाए गए थे कि कांग्रेस के वकील सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या मुद्दे के प्रस्ताव को रोक रहे है। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एक प्रमुख वकील ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस उन कार्यवाहियों में कभी पक्षकार नहीं थी।

उन्होंने कहा कि मैं आखिरी बार इस मामले में दिसंबर 2017 में पेश हुआ था। हम अब 2019 में हैं। अदालत के मामले को तय करने से किसको रोका? 2017 के बाद इस मामले में अब तक 15 बार सुनवाई हो चुकी है, उसे किसने रोका? पीएम ने सभी आरोप गलत है।

भाजपा पर निशाना साधते हुए सिब्बल ने कहा कि पार्टी का उपदेश है कि अगर अदालत का फैसला खिलाफ में आता है तो हम नहीं मानेंगे। हम तभी मानेंगे जब अदालत हमारे पक्ष में फैसला देगी। लेकिन वहीं दूसरी वे कहते हैं कि यह विश्वास की बात है। दोनों एक साथ नहीं की जा सकती।

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Posted By: Nitin Arora