नई दिल्ली, प्रेट्र। महात्मा गांधी 15 अगस्त, 1947 यानी भारत की आजादी का पहला दिन पाकिस्तान में बिताना चाहते थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने अपनी पुस्तक 'गांधीज हिंदुइज्म : द स्ट्रगल अगेंस्ट जिन्नाज इस्लाम' में यह दावा किया है। अकबर ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि हालांकि यह उस देश के लिए न तो प्रतीक और न ही समर्थन के लिए था जो बहुआस्था वाले भारत से अलग होकर एक धर्म इस्लाम के नाम पर बना था। उन्होंने कहा, 'गांधी यह यात्रा इसलिए करना चाहते थे क्योंकि उन्हें भारत के विभाजन और मनमाने ढंग से नई 'अप्राकृतिक' सीमाएं बनाए जाने में विश्वास नहीं था, जिसे उन्होंने क्षणभर का पागलपन बताया था।'

 

पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने अपनी पुस्तक में किया दावा

इस पुस्तक में उन लोगों की विचारधारा एवं व्यक्तित्व का विश्लेषण किया गया है, जिन्होंने क्षेत्र के भाग्य को स्वरूप दिया। इसमें 1940 से 1947 के बीच के विस्फोटक सात वर्षों के दौरान राजनीति को प्रभावित करने वाली गलतियों और खामियों की व्याख्या भी की गई है। इसमें कहा गया है कि एक धर्मपरायण हिंदू गांधी का मानना था कि आस्था भारत की सभ्यतागत सद्भाव का पोषण कर सकती है, जो वह भूमि थी जहां प्रत्येक धर्म फला फूला।

दूसरी तरफ जिन्ना एक राजनीतिक मुस्लिम थे, जो इस्लाम के नाम पर उप महाद्वीप को बांटने पर आमादा थे। उनका विश्वास युद्ध के समय ब्रिटेन के साथ किए गए सौदे पर आधारित था। दूसरी तरफ गांधी की ताकत वैचारिक प्रतिबद्धता में निहित थी।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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