जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। PM Modi visit to US : कश्मीर मुद्दा अगर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के किसी भी मंच से उठाता है तो उसका करारा व माकूल जवाब दिया जाएगा लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी अपनी आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान अपनी तरफ से कश्मीर को किसी मंच पर नहीं उठाने जा रहे। मोदी 21 सितंबर को अमेरिका की सात दिवसीय यात्रा पर पहुंच रहे हैं और तकरीबन पूरी यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस कारोबार से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने व निवेश बढ़ाने पर होगा। विदेश सचिव विजय गोखले ने इसे स्पष्ट कर दिया है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी होने वाली द्विपक्षीय वार्ता रणनीतिक लिहाज से काफी अहम होगी। ट्रंप के अलावा भी मोदी की तकरीबन 45 छोटे बड़े देशों के प्रमुखों के साथ अलग से बैठक होगी।

पीएम मोदी को बेहद व्‍यस्‍त दौरा

मोदी की अमेरिका यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि पहले दिन से ही बेहद व्यस्त कार्यक्रम की तैयारी है। मोदी की यात्रा की शुरुआत अमेरिका के ह्यूस्टन शहर से होगी जिसे इनर्जी कंपनियों के गढ़ के तौर पर जाना जाता है। मोदी की पेट्रोलियम सेक्टर की नामी गिरामी 16 कंपनियों के साथ बैठक की तैयारी है। इसमें टोटाल, विनमार, एक्सोनमोबिल, आईएसएस मार्किट, ब्रिटिश पेट्रोलियम, मैकडॉरमैट जैसी कंपनियां हैं। ह्यूस्टन की बैठक इसलिए भी अहम हो गई है कि अभी वैश्विक मंदी की वजह से तेल व गैस की दुनिया भर में खपत कम होने के आसार है।

भारत अभी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल व गैस खरीदार देश है ऐसे में इन सभी कंपनियों के लिए यह एक अहम बाजार है। पीएम मोदी की कोशिश होगी कि इन कंपनियों को भारत में तेल व गैस क्षेत्र में निवेश के लिए तैयार किया जाए। साथ ही हाल के वर्षो में अमेरिका से भारत ने तेल खरीदना भी शुरु कर दिया है और आगे इसमें और वृद्धि होने की संभावना है। इस लिहाज से भी यह बैठक महत्वपूर्ण होगी।

ट्रेड वार के बाद अमेरिकी कंपनियों के लिए बेहतरीन मौका

मोदी की न्यूयार्क में 25 सितंबर, 2019 को 43 कंपनियों के प्रमुखों या सीईओ के साथ अलग से एक मुलाकात है। जिन कंपनियों के प्रमुखों ने बैठक में हिस्सा लेने में रुचि दिखाई है उनमें आइबीएम, डिलॉयटे, बैंक ऑफ अमेरिका, जेपी मोर्गन, लॉकहीड मार्टिन, मैरियट इंटरनेशनल, मास्टरकार्ड, क्वालकॉम, वीजा, वालमार्ट, अमेजन, पेप्सीको, प्रडेंसिएल, फ्रैंकलिन टेम्पलटन, मेटलाइफ जैसी कंपनियां होंगी। पीएम मोदी की कोशिश यही होगी हाल के दिनों में भारत की तरफ से आर्थिक सुधार के जो कदम उठाये गये हैं उनके बारे में सीधे तौर पर इन दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों को बताया जाए। जानकारों के मुताबिक अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार शुरू होने से चिंतित अमेरिकी कंपनियों के बीच भारतीय बाजार की मार्केटिंग करने का यह एक बेहतरीन मौका है।

पीएम मोदी- डोनाल्‍ड ट्रंप एक साथ

एजेंडे में कारोबारी मुद्दों के सबसे ऊपर होने के बावजूद मोदी की इस यात्रा का सबसे चर्चित कार्यक्रम ह्यूस्टन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भारतवंशियों को संबोधित करने वाला 'हाउडी मोदी' ही होगा। विदेश मंत्रालय के सूत्र बता रहे हैं कि यह यात्रा एक अमेरिकी कूटनीति के लिहाज से भी काफी अलग है। हाल के वर्षों में वहां के राष्ट्रपति ने किसी दूसरे देश के प्रमुख के साथ मिल कर अमेरिकी और विदेशी नागरिकों के समारोह को संबोधित नहीं किया है। इसके राजनीतिक और कूटनीतिक मायने होंगे।

ट्रंप प्रशासन की तरफ से इशारा किया गया है कि मोदी के साथ संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से कुछ नई घोषणाएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा भी 24 सितंबर, 2019 को न्यूयार्क में मोदी और ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। वैसे यह पिछले तीन महीने में दोनो नेताओं के बीच तीसरी द्विपक्षीय बैठक होगी, लेकिन इस बार ज्यादा देर तक चलेगी और इसमें आपसी रिश्तों के तमाम आयामों पर चर्चा होगी। ट्रंप के अलावा मोदी की 45 देशों के नेताओं से मुलाकात की योजना है। इसमें 20 राष्ट्र प्रमुखों के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात होगी। जबकि प्रशांत समुद्री क्षेत्र में स्थित छोटे छोटे 12 देशों के समूह के साथ अलग से बहुपक्षीय बैठक होगी। इसके बाद कैरिबियन क्षेत्र के देशों के प्रमुखों के साथ भी उनकी अलग से मुलाकात का समय रखा गया है।

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Posted By: Arun Kumar Singh

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