अब उद्धव ठाकरे ने भी दोहराई 'रिजीम चेंज' की बात, बोले- विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार छीन रही सरकार
उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से सरकार का विरोध करने को 'रिजीम चेंज' कहा जाता है, तो ...और पढ़ें

उद्धव ठाकरे बोले- लोगों से मतदान करने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार छीन रही है
HighLights
उद्धव ठाकरे बोले- लोगों से मतदान करने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार छीन रही है
उद्धव ठाकरे ने प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन (रिजीम चेंज) के आह्वान का समर्थन किया
आईएएनएस, मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को केंद्र सरकार पर 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) की कोशिश करने के आरोपों को लेकर तीखी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से सरकार का विरोध करने को 'रिजीम चेंज' कहा जाता है, तो "हां, हम इसके लिए कोशिश कर रहे हैं। हम यहां इसी सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए खड़े हैं।"
ऑल इंडिया जर्नलिस्ट्स कान्फ्रेंस' द्वारा आयोजित एक पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए ठाकरे ने सवाल किया कि विपक्ष तब चुप कैसे रह सकता है, जब सत्ताधारी पक्ष नागरिकों को अपनी राय रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने जैसे उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर रहा हो।
उन्होंने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को "राष्ट्र-विरोधी" करार देने के लिए केंद्र पर निशाना साधा।
'रिजीम चेंज' शब्द को लेकर खड़े हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए वकील प्रशांत भूषण की हालिया टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने भूषण के 'रिजीम चेंज' के आह्वान का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि पुलिस युवाओं और महिलाओं के साथ मारपीट कर रही है और उनके कपड़े फाड़ रही है। ऐसी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंक देना चाहिए।
लोगों से मतदान करने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार छीन रही है : उद्धव ठाकरे
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा कि यदि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लोगों से मतदान और विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से अपनी बात रखने का अधिकार छीन रही है तो ऐसी सरकार को बदलने की आवश्यकता है। विपक्ष इसके लिए आवाज उठा रहा है।
उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन (रिजीम चेंज) के आह्वान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पुलिस युवाओं और महिलाओं के साथ मारपीट कर रही है और उनके कपड़े फाड़ रही है। ऐसी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंक देना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और अन्य दलों द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कथित हिंसा का जिक्र करते हुए यह बात कही।
अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए सवाल उठाया कि क्या दिल्ली में हजारों पुलिसकर्मियों को डांडिया खेलने के लिए तैनात किया गया है। उनकी टिप्पणी नवरात्र के मौजूदा त्योहार के साथ ही प्रदर्शनकारियों पर लाठियों के इस्तेमाल पर कटाक्ष थी।
