जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ट्रंप-किम के बीच हुई मुलाकात का भारत ने स्वागत तो किया है, लेकिन इस बात की चिंता भी है कि उत्तर कोरिया ने जिस तरह से अनाधिकृत तौर पर पाकिस्तान से परमाणु हथियार हासिल किये, यह बात कहीं दब न जाए। यही वजह है कि भारत चाहता है कि भविष्य में कोरियाई पेनिन्सुला का मामला जब पूरी तरह से सुलझाया जाए तो इस बात का भी पता लगाया जाए कि उत्तर कोरिया ने किस तरह से परमाणु हथियार हासिल किये है।

भारत ने कहा, जांच हो कहां से मिले उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक

भारत का मानना है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार दिलाने में अहम भूमिका निभाई है और इसकी मुकम्मल तौर पर जांच होनी चाहिए।

विदेश मंत्रालय ने सिंगापुर में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच हुई शीर्ष स्तरीय वार्ता को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा है कि वह कोरियाई पेनिन्सुला में शांति के लिए हमेशा से बातचीत व कूटनीति को महत्व देने का समर्थन करता रहा है। भारत ने उम्मीद जताई है कि इस वार्ता से समूचे कोरियाई द्वीप में स्थाई शांति का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही स्थाई शांति के लिए इस क्षेत्र के मुद्दों को जब सुलझाया जाएगा तो इस बात की भी जांच की जाएगी कि उत्तर कोरिया को किस तरह से अनाधिकृत तौर पर परमाणु हथियार मिले है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के कागजात बताते हैं कि पाकिस्तान की पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो के कार्यकाल में उत्तर कोरिया से लंबी दूरी के रोडोंग मिसाइल खरीदने के बदले परमाणु हथियारों से जुड़ी तकनीकी का लेन-देन हुआ था।

पाकिस्तान के परमाणु हथियार के जनक माने जाने वाले वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान के बारे में माना जाता है कि उन्होंने उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से जुड़ी तकनीकी मुहैया कराने में काफी अहम भूमिका निभाई है। भारत लगातार इसकी जांच करवाने की मांग करता रहा है।

By Bhupendra Singh