नई दिल्ली, (आइएनएस)। वर्ष 2013 में मतदाताओं के लिए एक नया विकल्प आया था नोटा (नन ऑफ द एबव)। जिसका अर्थ था कि इनमें से कोई नहीं। अगर मतादाता को किसी नभी पार्टी का कोई उम्मीदवार पसंद न हो तो वह नोटा का इस्तेमाल कर सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 1.33 करोड़ मतदाताओं द्वारा ईवीएम पर नोटा का विकल्प चुना गया है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच ने पिछले पांच सालों में एनटीए श्रेणी के तहत पंजीकृत मतों की संख्या का विश्लेषण किया था। एक रिलीज में कहा गया कि 2013 के बाद के चुनावों में 1,33,0 9, 577 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। 2017 में गोवा, दिल्ली और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में अधिक मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया।

गोवा चुनाव में पणजी और वलपई निर्वाचन क्षेत्रों में नोटा वोट क्रमशः 301 (1.94 प्रतिशत) और 458 (1.99 प्रतिशत) वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे। दिल्ली में बवाना निर्वाचन क्षेत्र में नोटा ने 1,413 वोटों (1.07 प्रतिशत) के साथ चौथा स्थान हासिल किया जबकि आंध्र प्रदेश के नंदील निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव में 1,231 (0.71 प्रतिशत) वोटों के साथ चौथे स्थान पर कब्जा किया।

2014 में जब लोकसभा चुनावों में पहली बार नोटा शुरू किया गया था, तो इसे 60,029,42 (1.08 प्रतिशत) वोट मिले थे। रिलीज के अनुसार लोकसभा चुनावों में सर्वाधिक वोटों की संख्या 46,559 तमिलनाडु में नीलगिरी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत हैं और सबसे कम वोट 123 लक्षद्वीप में मिले।

By Arti Yadav