संजय मिश्र, नई दिल्ली। पांच राज्यों के हो रहे चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के मुफ्त वादों की झड़ी ने ठंड के इस मौसम में उत्तर प्रदेश से लेकर गोवा तक सियासी गहमागमी के पारे में इजाफा कर दिया है। चुनावी बाजी अपने नाम करने के लिए जिस तरह मुफ्त स्कूटर, मोबाइल, टेबलेट, गैस सिलेंडर, नगदी देने से लेकर मुफ्त बिजली, पानी और यहां तक की तीर्थयात्रा के वादे करने की होड़ मची है उससे साफ झलक रहा कि जनता का भरोसा जीतने के लिए पार्टियों को अपनी नीतियों पर ही भरोसा नहीं है। छोटे से लेकर बड़े दल और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय पार्टियां में मची होड़ से साफ है कि इनकी चुनावी उम्मीदें विकास के विजन नहीं लुभावने वादों पर ज्यादा टिकी हैं। छोटी और नई पार्टियां इन सूबों में अपना राजनीतिक अस्तित्व कायम करने के लिए मुफ्त और हैरान करने वाले लुभावने वादे कर रही हैं।

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में मुफ्त वादों को लेकर सियासी गरमाहट का आलम यह है कि भाजपा, सपा और कांग्रेस ही नहीं आम आदमी पार्टी जैसी पार्टी भी बढ़ चढ़कर लुभावने वादों की झड़ी लगा रही है। चुनाव निकट आने के साथ बढ़ती चुनौती को थामने के लिए भाजपा की योगी सरकार ने कुछ दिनों पहले बिजली बिल के दर में कटौती की तो छात्रों को मुफ्त टेबलेट बांटने की शुरूआत की गई। चुनावी की घोषणा के चलते टेबलेट बांटने का सिलसिला लंबा नहीं चला मगर पार्टी ने सत्ता में दुबारा आने पर इसे जारी रखने की झलक दिखा दी।

भाजपा की मुख्य विरोधी समाजवादी पार्टी चुनावी अखाड़े की लड़ाई में मुफ्त वादों की कसरत से जोर लगाती नजर आ रही है। सपा ने 300 यूनिट घरेलू बिजली के साथ सिंचाई की बिजली मुफ्त देने, वृद्धा पेंशन की रकम तीन गुनी करने, लैपटॉप से लेकर मुफ्त इलाज जैसे कई बड़े वादों की फेहरिस्त रख दी है।

कांग्रेस ने किया लड़कियों को मुफ्त ई-स्कूटर देने का वादा

तीन दशक से उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी प्रासंगिकता की बहाली का प्रयास कर रही कांग्रेस ने तो इस मामले में इन दोनों दलों को पीछे छोड़ दिया है। महिलाओं को 40 फीसद टिकट के सियासी वादे पर अमल करते हुए सत्ता में आने पर कांग्रेस कालेज जाने वाली लड़कियों को मुफ्त ई-स्कूटर, स्मार्ट फोन, साल में छह रसोई गैस सिलेंडर देने का वादा कर रही है। इतना ही नहीं पार्टी सूबें में महंगे बिजली बिल से राहत के लिए इसमें 50 फीसद कमी और सिंचाई की बिजली मुफ्त करने का भी वादा कर रही है।

मुफ्त वादों के इस होड़ में बसपा अभी नहीं हुई शामिल

सूबे में नए सियासी खिलाड़ी के तौर पर उतरने के प्रयास में जुटी आम आदमी पार्टी भी चाहे चुनावी अखाड़े में नजर न आए मगर मुफ्त वादों की होड़ में वह बड़े दलों को भी पीछे छोड़ना चाहती है। मुफ्त बिजली ओर पानी से लेकर तीर्थयात्रा का दिल्ली माडल उसका सबसे प्रमुख चुनावी अस्त्र दिख रहा है। दिलचस्प यह है कि सूबे की एक अन्य प्रमुख पार्टी बसपा जरूर अभी तक इस होड़ में शामिल होती नजर नहीं आयी है।

पंजाब में सिद्धू ने भी लुभावने वादों की पेश की लिस्ट

पंजाब में तो मुफ्त वादों की झड़ी ही चुनावी बिसात की मुख्य धुरी बन रही है। सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी आप ही नहीं अकाली दल बादल में चुनाव से पहले लुभावने वादों की कसौटी पर एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ मची है। चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्यमंत्री बनते ही सूबे में बिजली दर तीन रुपए यूनिट कम कर दी। तो अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी का घोषणा पत्र आने से पहले ही आम आदमी के मुफ्त वादों के जवाब में लुभावने वादों की लंबी लिस्ट पेश कर दी है। इसमें गृहणियों को हर महीने दो हजार नगद, कालेज जाने वाली लड़कियों को स्कूटी, 12वीं पास करने वाली छात्रा को 20 हजार, 10वीं पास की छात्रा को 15 हजार और पांचवी पास करने वाली लड़की को पांच हजार रुपए देने का वादा है।

अकाली दल भी लुभावने वादों में नहीं दिख रहा है पीछे

किसानों का कर्ज माफ करने का भी वादा हो रहा है। वहीं, आप ने हर महीने 300 यूनिट बिजली देने, मुफ्त इलाज के लिए 16000 पिंड क्लिनिक, मुफ्त तीर्थयात्रा और सूबे की हर गृहणी को एक हजार रुपए महीने देने का वादा किया है। अकाली दल बादल भी चुनावी लड़ाई की होड़ में बने रहने के लिए लुभावने वादों में पीछे नहीं दिख रहा है उसने हर माह 400 यूनिट फ्री बिजली, ब्लू कार्ड होल्डर महिलाओं को हर महीने दो हजार नगद और सिंचाई के डीजल पर छूट देने की बात कही है।

धामी सरकार ने मुफ्त टेबलेट बांटने की शुरुआत की

उत्तराखंड में कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र में भी कई मुफ्त वादों की फेहरिस्त बन रही है तो भाजपा की धामी सरकार ने चुनाव से ठीक पहले मुफ्त टेबलेट बांटने की शुरूआत कर पार्टी के सियासी दांव का संकेत दे दिया। वहीं सूबे की सियासत में तीसरा कोण बनाने की कसरत में जुटी आप के मुफ्त पानी, बिजली और बेरोजगारी भत्ते के वादे से साफ है कि लुभावने वादों के बल पर ही वह उत्तराखंड में अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रही है।

कुछ यही स्थिति गोवा में भी है जहां आप को तृणमूल कांग्रेस के सूबे की हर गृहणी को पांच हजार रुपए प्रति महीने देने के वादे से मिल रही है। गोवा में इन छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों के मुफ्त वादे की सियासत से भाजपा और कांग्रेस पर भी इसी राह चलने का दबाव बन रहा है।