जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के अतिक्रमण ने भारत के साथ उसके रिश्तों के हर पहलू को प्रभावित कर दिया है। चीन की कंपनियों के खिलाफ कई तरह के कदम उठा चुका भारत अब रिश्तों को सामान्य बनाये रखने की दिखावट नहीं करना चाहता। ऐसे में भारत व चीन के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित होने की 70वीं वर्षगांठ पर आयोजित होने वाले दर्जनों कार्यक्रमों को लेकर भारत ने एकदम ठंडा रवैया दिखाया है।

चीन के साथ शिक्षा समझौतों को भी ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी

चीन के साथ किये गये तमाम शिक्षा समझौतों को भी ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है। भारत के इस रुख पर चीन ने चिंता जताई है और आम जनता के बीच संबंधों को बढ़ाने वाली कोशिशों को बनाये रखने की बात कही है।

भारत-चीन के कूटनीतिक संबंध के 70वीं वर्षगांठ पर 70 कार्यक्रम पर मामल्लापुरम में बनी थी सहमति

पिछले वर्ष मामल्लापुरम में पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी शिनफिंग के बीच यह सहमति बनी थी कि दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध स्थापित होने के 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर 70 तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। बाद में दोनो देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों के बीच यह तय किया गया कि इसमें सें 35 कार्यक्रम भारत में और इतने ही चीन में आयोजित किये जाएंगे। माना गया कि कूटनीतिक वर्षगांठ के इस अवसर के जरिए दुनिया की करीब 2.7 अरब जनता को एक साथ लाया जाए। भारत को भी चीन से पर्यटन में भारी वृद्धि का अनुमान था इसलिए जिस दिन मामल्लापुरम में उक्त घोषणा की गई उसी दिन बीजिंग स्थित भारतीय मिशन ने चीनी नागरिकों को आसानी से पर्यटन वीजा देने का फैसला किया गया।

वास्तविक नियंत्रण रेखा के हालात के चलते 70 तरह के कार्यक्रमों की संभावना नहीं

इस बारे में आगे का कार्यक्रम तय करने के लिए मई-जून में बैठक करने की सहमति बनी थी, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा के हालात को देखते हुए फिलहाल किसी विमर्श की ना तो संभावना है और ना ही दोनोंं पक्षों की तरफ से कोई पेशकश है। पिछले दो महीनों में दोनोंं देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच सिर्फ सीमा विवाद सुलझाने पर विशेष व्यवस्था के तहत ही बैठक हुई है।

भारत के लिए पहली प्राथमिकता- चीन के सैनिक एलएसी का पालन करें

सूत्र बताते हैं कि भारत के लिए पहली प्राथमिकता यही है कि चीन के सैनिक एलएसी का पालन करें और मई, 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल करें। भारतीय पक्षकार लगातार यह कह रहे हैं कि सीमा पर अमन व शांति ही द्विपक्षीय संबंधों को तय करेगा।

चीन के साथ सारे सांस्कृतिक व शैक्षणिक समझौतों को ठंडे बस्ते में डालने पर विचार

उधर, नई दिल्ली में चीन के साथ सारे सांस्कृतिक व शैक्षणिक समझौतों को ठंडे बस्ते में डालने पर विचार किया जा रहा है। विगत कुछ वर्षो में दोनो देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ताओं का दौर बढ़ने की वजह से समझौतों की संख्या भी काफी बढ़ गई थी। सिर्फ शिक्षा क्षेत्र में दोनो देशों के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के बीच 54 समझौते हो चुके थे। चीन के कंफ्यूसिएस इंस्टीट्यूट और भारतीय सस्थानों के बीच किया गया समझौता भी है।

चीन के साथ कारोबार आदि बढ़ने के साथ ही चीनी भाषा की पढ़ाई काफी बढ़ चुकी है- चीनी राजदूत

नई दिल्ली स्थित चीनी राजदूत की प्रवक्ता का कहना है कि चीन के साथ कारोबार आदि बढ़ने के साथ ही भारत में चीनी भाषा की पढ़ाई काफी बढ़ चुकी है। कंफ्यूसियस इंस्टीट्यूट व दूसरे भारतीय संस्थानों के बीच कानूनी तौर पर बाध्य समझौता है। यह संस्थान भारत में चीनी भाषा को बढ़ाने में अहम योगदान दे रहा है और साथ ही दोनोंं देशों की जनता को करीब लाने का भी काम कर रहा है। हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष इस बारे में साफ मनोदशा से कदम उठाएगा व इस समझौते का राजनीतिकरण की करने की कोशिश नहीं करेगा। 

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