नई दिल्ली, एएनआइ। पूर्वाग्रह और पैरवी के आधार पर पद्म पुरस्कार प्रदान नहीं किए जाते हैं। यह पुरस्कार केवल उन्हीं लोगों को दिए जाते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण कार्य करते हुए समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने दी। राय ने बताया कि 1954 में पद्म पुरस्कारों की स्थापना के बाद से अब तक 272 विदेशी, अनिवासी भारतीय और भारतीय मूल के व्यक्तियों को इन पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

राय के मुताबिक चयन समिति ने पद्म पुरस्कारों के लिए किसी प्रकार का कठोर मानदंड या फार्मूला नहीं बनाया है। हालांकि पुरस्कार के लिए व्यक्ति का चयन करते समय सार्वजनिक क्षेत्र में किए गए उसके काम को महत्व जरूर दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि बिना किसी भेदभाव के किसी भी जाति, व्यवसाय, स्थिति और लिंग का व्यक्ति पद्म पुरस्कारों के लिए पात्र हो सकता है। हालांकि डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को छोड़कर कोई भी सरकारी कर्मचारी इन पुरस्कारों के लिए पात्र नहीं हैं।

Posted By: Nitin Arora

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