नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़े उन अधिकारियों को एक फिर कड़ा संदेश दिया जो अक्षम और नाकारा हैं और परियोजना से जुड़े कार्यो में बाधा डाल रहे हैं। गडकरी ने कहा कि उन अधिकारियों को हटाने अथवा उनको डिमोट करने पर सरकार विचार करेगी। कोरोना महामारी के चलते देश के कई हाईवे प्रोजेक्ट का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

गडकरी ने कहा कि ऐसे अधिकारियों को पूर्व में कई बार पर्याप्त चेतावनी दी जा चुकी है। वे फाइलों में कुंडली मारकर बैठे हैं और कोई फैसला नहीं करते। अधिकारियों को फाइलों पर निर्णय लेने की पर्याप्त शक्ति देने के लिए प्रमोट किया गया, अब इनकी नाकामी के कारण हमारे बहुत सारे हाईवे प्रोजेक्ट कार्य प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि वे फाइलों में कुंडली मारकर बैठ गए हैं और कोई फैसला नहीं कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि ऐसे अधिकारियों को डिमोट किया जाए अथवा हटाया जाए।

15 लाख करोड़ की लागत से सड़क निर्माण का लक्ष्य

एक साक्षात्कार में गडकरी ने कहा, हाईवे से जुड़ी परियोजनाओं में हुए नुकसान की भरपाई और कार्यो को पटरी पर लाने के लिए अगले दो वर्षो के लिए 15 लाख करोड़ की लागत से सड़कों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे पहले गडकरी ने 16 राज्यों के 28.304 किमी.के 740 हाईवे प्रोजेक्टों की समीक्षा की। ये प्रोजेक्ट लगभग पांच लाख करोड़ की लागत के हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों को अपने स्तर पर तत्काल 50 करोड़ रुपये की लागत के कार्य पर तुरंत फैसले का अधिकार दिया गया है, इसके बावजूद हर चीज के लिए वे हेड ऑफिस की ओर भागते हैं। नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) के बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट डायरेक्टर और क्षेत्रीय अधिकारियों को काम में तेजी लाने और फाइलों पर तत्काल फैसला लेने को बार-बार चेताया गया है। अधिकारी निर्णय लेने से डर रहे हैं, जिम्मेदारी से भाग रहे हैं और हर प्रश्न और छोटी-सी छोटी बातें हमकों भेज देते हैं। जो अधिकारी फैसला नहीं कर सकते उनको हमारे साथ नहीं बने रहना चाहिए। एनएचएआइ के देश में 175 प्रोजेक्ट डायरेक्टर और 25 क्षेत्रीय अधिकारी हैं।

Posted By: Dhyanendra Singh

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