राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। क्यूआर कोड वाली मतदाता पर्ची से मतदान करने का मौका इस बार सिर्फ 11 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं को ही मिलेगा। दरअसल सोमवार को चुनाव आयोग ने इतने विधानसभा क्षेत्रों में इस तरह की पर्ची के इस्तेमाल की स्वीकृति दी है। हालांकि दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में इसे लागू करने की तैयारी की गई थी।

क्यूआर कोड का इस्तेमाल अभी ट्रायल के चरण में

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. रणबीर सिंह ने कहा कि क्यूआर कोड का इस्तेमाल अभी ट्रायल के चरण में है। झारखंड में पांच विधानसभा क्षेत्रों में इस्तेमाल किया गया था। अब दिल्ली में चुनाव आयोग ने हर जिले में एक विधानसभा क्षेत्र में इसे लागू करने का निर्देश दिया है। इस तरह आने वाले समय में चुनाव आयोग इसका इस्तेमाल बढ़ाएगा।

क्यूआर कोड वाली पर्ची का इस्तेमाल

उन्होंने कहा कि सभी जिले के निर्वाचन अधिकारी क्यूआर कोड के इस्तेमाल के लिए एक-एक विधानसभा क्षेत्र का नाम प्रस्तावित करेंगे। इसके आधार पर 11 विधानसभा क्षेत्रों के सभी मतदान केंद्रों पर इसका इस्तेमाल होगा। इन केंद्रों के प्रवेश द्वार पर हेल्प डेस्क की व्यवस्था होगी, वहीं पर मोबाइल लॉकर की भी सुविधा दी जाएगी। हेल्प डेस्क पर बीएलओ (बूथ लेबल अधिकारी) मौजूद रहेंगे, जो बूथ एप से क्यूआर कोड को स्कैन कर मतदाता को बूथ के अंदर भेजेंगे। जिनके पास पर्ची उपलब्ध नहीं होगी वे डिजिटल फोटो मतदाता पर्ची का इस्तेमाल कर सकेंगे। वोटर हेल्पलाइन एप की मदद से डिजिटल फोटो मतदाता पर्ची मोबाइल पर उपलब्ध हो सकती है।

क्यूआर कोड पर्ची वाले मतदाता अंदर ले जा सकेंगे मोबाइल

उन्होंने बताया कि जिन केंद्रों पर क्यूआर कोड वाली पर्ची दी जाएगी। उन्हीं केंद्रों पर मतदाताओं को मोबाइल अंदर ले जाने की इजाजत होगी, क्योंकि क्यूआर कोड बूथ के अंदर भी स्कैन किया जाएगा। हालांकि, ईवीएम तक मोबाइल ले जाने की सुविधा नहीं होगी। डिजिटल पर्ची का जो लोग इस्तेमाल नहीं करेंगे, उनके लिए बेहतर होगा कि वे मतदान केंद्र पर मोबाइल लेकन न जाएं। इससे उनके समय की बचत होगी।

11 जनवरी तक मतदाता सूची में जुड़ सकता है नाम

मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम नहीं है, वे 11 जनवरी तक सूची में नाम शामिल करने के लिए आवेदन दे सकते हैं। इसके बाद आवेदन करने वाले इस चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।

चुनाव आयोग सुरक्षा-व्यवस्था से संतुष्ट

जेएनयू की घटना के मद्देनजर पूछे गए सवाल पर सीईओ ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था पुलिस का मामला है। चुनाव आयोग ने उसकी समीक्षा भी की है। आयोग कानून व्यवस्था से अवगत है। इसके बाद ही चुनाव की तिथि घोषित की गई है। दिल्ली में कोई परेशानी नहीं है। विशेष परिस्थिति में चुनाव आयोग को सुरक्षा व्यवस्था पर संशय महसूस होता है तब इस पर विचार हो सकता है।

Posted By: Bhupendra Singh

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