नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर एक बार फिर सख्ती दिखाई है और पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से ताजा रिपोर्ट तलब किया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में निर्माण कार्यों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध में ढील देते हुए सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक निर्माण कार्य की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कार्यो को लेकर यह ढील केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की उस रिपोर्ट के आधार पर दी है, जिसमें रात में निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध जारी करने पर जोर दिया गया था। साथ ही कहा गया था कि यदि निर्माण कार्यों को लेकर कोई ढील देनी है, तो वह सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक की दी जाए। निर्माण कार्यों पर यह रोक एक नवंबर को वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद लगाई गई थी।

निर्माण कार्यों पर लगी रोक में ढील देने का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्र और दीपक गुप्ता की पीठ ने सोमवार को वायु प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया है। इस बीच केंद्र सरकार ने भी कोर्ट के सामने एक रिपोर्ट रखी। इसमें बताया कि कोर्ट के निर्देश के बाद वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दुनिया में प्रचलित तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाशने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर दी गई है। इसमें आइआइटी सहित दूसरे तकनीकी संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है।

इस पर कोर्ट ने कमेटी में दिल्ली सहित यूपी, पंजाब और हरियाणा के आला अधिकारियों को शामिल करने के निर्देश दिए। पीठ के सामने दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि कोर्ट के निर्देश के बाद एंटी स्मोक गन जैसे उपायों को लेकर सहमति बनी है। जल्द ही इसे ट्रायल के तौर पर दिल्ली के कुछ स्थानों पर लगाया जाएगा।

बता दें कि इस स्मोक गन के जरिए हवा में 50 मीटर तक पानी का छिड़काव किया जाता है। जिसके चलते हवा में मौजूद भारी प्रदूषक कण पानी में घुलकर जमीन पर बैठ जाते हैं। शीर्ष अदालत ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से 11 दिसंबर तक पराली जलाने से जुड़ी रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके साथ कोर्ट ने 16 दिसंबर को प्रदूषण से जुड़े मामले की फिर से सुनवाई करने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों वायु प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। साथ ही कहा था कि आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मिलजुलकर समस्या से निपटें और लोगों को जहरीली हवा से बचाएं।

Posted By: JP Yadav

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