नई दिल्‍ली, जेएनएन। आज हॉकी के जादूगर के रूप में विख्यात मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन है। ध्यानचंद के जन्मदिवस को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। ध्यानचंद ने भारत को ओलंपिक में 3 स्वर्ण पदक दिलवाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खेल दिवस के अवसर पर खेल प्रेमियों को बधाई देते हुए ध्‍यानचंद को श्रद्धांजलि दी है।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, 'राष्ट्रीय खेल दिवस पर सभी खेल उत्साही को बधाई। असाधारण हॉकी खिलाड़ी, मेजर ध्यानचंद जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे खेल और फिटनेस से संबंधित गतिविधियों को प्राथमिकता दें, जो एक स्वस्थ भारत की ओर योगदान देगा।'

साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि यह साल हमारी खेल बिरादरी के लिए बेहद अच्‍छा रहा है। एशियाई खेल 2018 और कॉमन वेल्‍थ गेम्‍स समेत विभिन्न टूर्नामेंटों में भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन किया है।

...जब ध्यानचंद हॉकी मैच देखने के लिए लाइन में खड़े हुए
ध्यानचंद की हॉकी के जादू को देखने के लिए जहां दुनिया लाइन लगाए रहती थी, लेकिन भारतीय खेलों की राजनीति ने उन्हें अपने खेल को देखने के लिए टिकट की लाइन में खड़ा कर दिया था। ओलंपिक स्वर्ण पदकधारी और पूर्व कप्तान गुरबक्श सिंह ने अपनी आत्मकथा 'माई गोल्डन डेज' में भारत के इस महान खिलाड़ी के बारे में लिखा है, जिनकी जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्‍हें टिकट लेकर हॉकी का मैच देखना पड़ा था। यह घटना 1962 अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान हुई, जब पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआइएस) और भारतीय हॉकी महासंघ के बीच टकराव चल रहा था और ध्यानचंद को मुख्य कोच होने के बावजूद इसका दंश झेलना पड़ा। ध्यानचंद तब एनआइएस पटियाला के मुख्य कोच थे और वह अपने प्रशिक्षुओं के साथ टूर्नामेंट देखने पहुंचे थे। गुरबक्श ने किताब में लिखा, 'उन्हें प्रवेश कार्ड नहीं दिया गया। ध्यानचंद जैसे व्यक्ति को अपने खिलाडिय़ों के साथ हर मैच के लिए टिकट खरीदने के लिए पंक्ति में खड़ा होने को बाध्य कर दिया गया।

Posted By: Tilak Raj