रायपुर, जेएनएन। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले में नामदारों को बचाने के लिए डीजी मुकेश गुप्ता और तत्कालीन एसपी रजनेश सिंह ने कंप्यूटर रिकार्ड डिलीट करवा दिया था। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (इओडब्ल्यू) के आला अधिकारियों के अनुसार, नान के अधिकारियों ने बकायदा कंप्यूटर और पेन ड्राइव में पैसा पहुंचाने वालों का नाम दर्ज किया था।

भूपेश सरकार ने जब इन कंप्यूटर और पेन ड्राइव की एफएसएल हैदराबाद में जांच कराई तो डिलीट किए गए 133 पेज रिकवर हो गए। इसी के आधार पर इओडब्ल्यू ने गुप्ता और सिंह के खिलाफ एफआइआर दर्ज किया है। अब इन दोनों अफसरों की गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है। एसआइटी के आला अधिकारियों ने बताया कि रिकवर किए गए 133 पेज की जांच शुरू कर दी गई है। इनमें करीब 42 लोगों के नाम कोडवर्ड में हैं और इन लोगों को हर महीने करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि जिस समय कंप्यूटर और पेन ड्राइव के डाटा को डिलीट किया गया, उस समय किसी अधिकारी को उम्मीद नहीं थी कि डाटा रिकवर हो जाएगा। बताया जा रहा है कि नान डायरी के ओरिजनल पन्ने भी गुप्ता के पास ही थे।

क्या है मामला
इओडब्ल्यू ने 12 फरवरी 2015 को राज्य में नान के अधिकारियों और कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापा मार कर करोड़ों रुपये बरामद किए थे। साथ ही भ्रष्टाचार से संबंधित कई दस्तावेज, हार्ड डिस्क और डायरी भी जब्त की थी। आरोप है कि राइस मिल संचालकों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों की रिश्वतखोरी की गई। विपक्ष में रहते कांग्रेस ने इसको लेकर तत्कालीन रमन सरकार व सत्ता प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए थे। यही वजह है कि सत्ता में आते ही कांग्रेस मामले की नए सिरे से जांच करा रही है।

 

Posted By: Tanisk