जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि विज्ञानी प्रयोगशाला में कठिन शोध द्वारा हासिल जानकारी को किसानों तक उनकी भाषा में पहुंचाएं, तभी इसका व्यापक प्रभाव होगा। कृषि शोध व तकनीकों से जुड़ी पुस्तक व पुस्तिकाओं को अंग्रेजी के साथ-साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशित किया जाए।

जर्मनी में तो संस्कृत पर शोध होता, हम अंग्रेजी को अहमियत देते हैं- उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति पूसा में आयोजित दीक्षा समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें पूरी जिंदगी में तीन चीजों को कभी नहीं भूलना चाहिए। ये हैं-जन्मभूमि, मातृभूमि व मातृभाषा। उन्होंने मातृभाषा के साथ वैज्ञानिकों को भारतीय जीवन पद्धति भी अपनाने की सलाह दी। कहा कि रूस, फ्रांस, जर्मनी जैसे देश अपनी भाषाओं को बढ़ावा देते हैं। जर्मनी में तो संस्कृत पर शोध होता है, लेकिन हम अपने यहां अंग्रेजी को अहमियत दे रहे हैं। अंग्रेजी मानसिकता से हमें बाहर निकलना चाहिए।

किसानों तक उनकी भाषा में बात पहुंचाएं विज्ञानी : वेंकैया

उपराष्ट्रपति ने कहा कि या तो किसानों को अपने बीच बुलाइए, यदि वे नहीं पहुंच सकते हैं तो आप उनके बीच जाएं। यदि उनकी भाषाओं में प्रकाशित पुस्तक-पुस्तिकाओं के माध्यम से उपलब्धियां बताएंगे तो वे अधिक फायदा उठा सकेंगे। यह बात तब और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब हमें यह पता है कि देश में छोटे जोत वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। इनके पास संसाधन का अभाव है। इन तक तकनीक, पूंजी व बाजार पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। ऐसा तभी होगा, जब हम किसानों तक पहुंचेंगे और अपनी बात समझा सकेंगे।

शरीर को फिट रखने में योग मदद करता है

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक योग से जुड़ें। कई लोग योग को धर्म से जोड़कर देखते हैं, लेकिन योग किसी धर्म या व्यक्ति से जुड़ा नहीं बल्कि हमारे शरीर से जुड़ा है। बदलती जीवनशैली में हम शारीरिक क्रियाकलाप से दूर होने लगे हैं, मन व शरीर को फिट रखना चुनौती है। योग इसमें हमारी मदद करेगा।

पिज्जा व बर्गर जैसे जंक फूड हमारे देश का नही, पाश्चात्य देशों का खानपान है

इसी तरह आजकल जंक फूड पर जोर दिया जाता है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि पिज्जा व बर्गर जैसे जंक फूड हमारे देश के लिए नहीं बने हैं। यह पाश्चात्य देशों का खानपान है। हमारे पूर्वजों से हमें जो खानपान की विरासत मिली है उसमें क्षेत्र व मौसम को प्रमुखता दी गई है। हम जहां रहते हैं, हमें उस क्षेत्र का खानपान अपनाना चाहिए।

आलू सस्ता, चिप्स महंगा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह विडंबना है कि आलू सस्ता बिकता है, लेकिन चिप्स महंगा खरीदते हैं। प्याज नासिक में एक रुपये किलो तो दिल्ली में उसकी कीमत 30 रुपये पहुंच जाती है। अन्य देश हमसे आलू आयात करते हैं और चिप्स हमें निर्यात करते हैं।

देश में विपणन से जुड़ी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं

ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि हमारे यहां कोल्ड स्टोरेज, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, विपणन से जुड़ी सुविधाएं पर्याप्त नहीं है। हमें इस पर ध्यान देना होगा। उपराष्ट्रपति ने फसल के विविधिकरण व समेकित कृषि प्रणाली की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ये चीजें जोखिम को कम करने में मददगार हैं।

Posted By: Bhupendra Singh

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