माला दीक्षित, नई दिल्ली। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए गठित सर्वोच्च संस्था लोकपाल में अब तक भ्रष्टाचार की कोई बड़ी शिकायत तो नहीं आई है लेकिन नौकरी, संपत्ति से जुड़ी शिकायतों का ढेर लग गया है। प्रधानमंत्री, मंत्रियों और आला अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों की जांच के लिए गठित लोकपाल फिलहाल इन छिटपुट शिकायतों को निपटाने में जुटा है। पिछले दो महीनों में लोकपाल ने 310 शिकायतों का निपटारा किया है। 160 अभी लंबित हैं जिन्हें निपटाने के लिए जल्दी ही लोकपाल की पूर्णपीठ की तीसरी बैठक होने वाली है।

लंबे इंतजार के बाद इसी वर्ष मार्च में लोकपाल अध्यक्ष जस्टिस पीसी घोष और आठ सदस्यों की नियुक्ति हुई और उसके बाद भ्रष्टाचार पर निगहबानी की सर्वोच्च संस्था ने कामकाज शुरू किया।

लोकपाल सिर्फ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के लिए है। उसके अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद और ग्रुप ए, बी, सी और डी ग्रेड के अधिकारियों व केन्द्रीय कर्मचारियों के खिलाफ आने वाली भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करना है लेकिन बड़ी अपेक्षाओं के साथ गठित हुई इस संस्था को लोग कुछ भी शिकायतें भेज रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि बहुत सी शिकायतें तो नौकरी, पेंशन, संपत्ति विवाद, जमीन विवाद या लंबित मुकदमों से जुड़ी होती हैं जिन्हें सुनना लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यहां तक कि लोग नौकरी का आवेदन भी शिकायत में भेज रहे हैं। इतना ही नहीं बहुत सी शिकायतें लोकपाल के पास प्रति के रूप में संलग्न करके भेजी जाती हैं। जैसे कि मुख्य शिकायत प्रधानमंत्री को भेजी गई और उसकी एक प्रति लोकपाल को भी भेज दी गई।

सूत्र बताते हैं कि ऐसे मामलों में भी लोकपाल की ओर से शिकायतकर्ता को जवाब दिया जाता है और बताया जाता है कि मुख्य शिकायत उनसे नहीं की गई है इसलिए इस पर विचार करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। पिछले महीने मई में लोकपाल की पूर्ण पीठ की दो बार बैठक हुई जिसमें कुल 310 शिकायतों का निपटारा किया गया।

लोकपाल में शिकायत करने को लेकर लोगों में भ्रम शायद इसलिए है क्योंकि देश में इस संस्था का गठन पहली बार हुआ है। लोगों को लगता है कि उनकी हर समस्या का हल लोकपाल के पास होगा। सूत्र बताते हैं कि नौकरी या अन्य मुद्दों से जुड़ी शिकायतों पर शिकायतकर्ता को बताया जाता है कि यह लोकपाल के क्षेत्राधिकार में नहीं है वे उचित फोरम में जाएं।

लोकपाल तेजी से काम जरूर कर रहा है, लेकिन अभी तक न तो उसके पास कोई स्थाई दफ्तर है और न ही पर्याप्त स्टाफ। लोकपाल दिल्ली के अशोका होटल में कामकाज कर रहा है। उसके लिए स्थाई दफ्तर की जगह खोजने का काम जारी है। लोकपाल में शिकायतों का प्रारूप भी अभी नोटीफाई होना है। 

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Posted By: Bhupendra Singh

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