जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली।जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट प्रोन्नत करने पर न्यायपालिका के साथ लंबे समय से चल रहे विवाद को सरकार ने विराम दे दिया है। सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट प्रोन्नति को हरी झंडी दे दी है। जस्टिस जोसेफ को प्रोन्नत करने की दूसरी बार भेजी गई कोलीजियम की सिफारिश सरकार ने स्वीकार कर ली है।

इसके अलावा सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विनीत शरण को भी सुप्रीम कोर्ट प्रोन्नत करने की कोलीजियम की सिफारिश मान ली है। इन तीन नये न्यायाधीशों के आने के बाद सुप्रीम कोर्ट मे कुल न्यायाधीशों की संख्या 25 हो जाएगी। जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट प्रोन्नत करने को लेकर न्यायपालिका और सरकार के बीच पिछले 7 महीने से टकराव चल रहा था। जोसेफ की प्रोन्नति दोनों के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई थी।

सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम ने जोसेफ के नाम की पहली बार गत 10 जनवरी को सिफारिश की थी लेकिन सरकार ने करीब चार महीने सिफारिश लंबित रखने के बाद जोसेफ का नाम पर पुनर्विचार के लिए कोलीजियम को वापस भेज दिया था। सरकार ने जस्टिस जोसेफ का नाम वापस करते हुए उनकी वरिष्ठता पर सवाल उठाए थे। साथ ही ये भी कहा था कि जस्टिस जोसेफ मूलत: केरल हाईकोर्ट से आते हैं जबकि केरल का पहले ही सुप्रीम कोर्ट मे पर्याप्त प्रतिनिधित्व है और बाकी कई प्रान्त हैं जिनका सुप्रीम कोर्ट में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इसके बाद न्यायपालिका में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।

जस्टिस जे. चेलमेंश्वर (अब सेवानिवृत) ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर सिफारिश दोबारा भेजे जाने की बात कही थी इसके अलावा कोलीजियम के दूसरे सदस्य जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भी एक बयान में सिफारिश दोहराने की बात कही थी। इसके बाद कोलीजियम ने गत 20 जुलाई को सरकार की आपत्तियां दरकिनार करते हुए जस्टिस जोसेफ के नाम की दोबारा सिफारिश कर दी थी। कोलीजियम ने दोबारा भेजी सिफारिश में कहा था कि उसने सरकार के 26 और 30 अप्रैल के पत्रों में उठाई गई आपत्तियों पर गहनता से विचार किया है और सारे पहलुओं पर गौर करने के बाद वह अपनी सिफारिश दोहराती है।

विशेषतौर पर इस बात को देखते हुए कि जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट जज पद की उपयुक्तता के बारे में सरकार के पत्र में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं है। तय नियमों के मुताबिक कोलीजियम की ओर से दूसरी बार भेजी गई सिफारिश सरकार पर बाध्यकारी होती है। हालांकि कोलीजियम ने कई प्रान्तों का सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व न होने की सरकार की बात पर विचार करते हुए न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायाधीश विनीत शरण के नाम की भी सिफारिश की थी। सरकार ने इन दोनों की सिफारिश भी स्वीकार कर ली है।

सूत्र बताते हैं कि तीनों न्यायाधीशों की सुप्रीम कोर्ट नियुक्ति के बारे में जल्दी ही औपचारिक आदेश जारी हो जाएंगे। यानि जस्टिस जोसेफ का सुप्रीम कोर्ट आना लगभग तय हो गया है लेकिन सात महीने तक उनका नाम लटके रहने से वे वरिष्ठता में कुछ पीछे चले गए हैं क्योकि इस बीच सुप्रीम कोर्ट मे दो नये न्यायाधीश नियुक्ति हो चुके हैं। वैसे न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच एक और घटना घटी थी। कोलीजियम ने जस्टिस अनुरुद्ध बोस को दिल्ली हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी लेकिन सरकार ने जस्टिस बोस का नाम दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए वापस कर दिया था और कोलीजियम से इस पर पुनर्विचार करने को कहा था।

जिसके बाद कोलीजियम ने अपनी सिफारिश बदलते हुए जस्टिस बोस को दिल्ली के बजाए झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश भेजी थी और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन को दिल्ली हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। माना जा रहा है कि न्यायपालिका ने भी इस तरह सरकार के बीच टकराव को टालने का प्रयास किया था। सरकार ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के लिए श्रीमती सिंधु शर्मा और राशिद अली डार को भी जज नियुक्त किया है। पटना हाईकोर्ट में जज के रूप में अतिरिक्त जस्टिस अरुण कुमार को प्रोन्नत किया गया है।

Posted By: Tilak Raj