नई दिल्ली, प्रेट्र। राज्यसभा में बुधवार को सरकार ने कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला करने के लिए संविधान में संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है। उधर, तृणमूल कांग्रेस के 12 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल इस सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला।

गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा, 'किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत होती है। फिलहाल इस मामले में संविधान संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है।' राय ने कहा कि बांग्ला नाम पड़ोसी देश बांग्लादेश की तरह है।

राज्यसभा में वह उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें पूछा गया था कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला किए जाने संबंधी राज्य सरकार के प्रस्ताव को केंद्र ने क्यों अस्वीकृत कर दिया।

मंत्री ने कहा, 'गांव, शहर या रेलवे स्टेशन आदि का नाम बदलने के लिए प्रशासनिक दिशा-निर्देश तय हैं। राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों के नाम में बदलाव के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति जरूरी है।'

उन्होंने बताया कि जब भी गांव, शहर, रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे के नाम में बदलाव का प्रस्ताव आता है, मंत्रालय संबंधित विभागों से राय लेता है और उसके अनुरूप निर्णय लिया जाता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल 26 जुलाई को पश्चिम बंगाल विधानसभा ने तीन प्रचलित भाषाओं बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी में राज्य का नाम बदलकर बांग्ला करने का प्रस्ताव सर्वानुमति से पारित कर केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष भेजा था।

एएनआइ के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 12 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला करने के लिए संविधान संशोधन प्रस्ताव लाने की मांग की।

Posted By: Bhupendra Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप