जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। ठीक चार महीने बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कश्मीर में मध्यस्थता करने की बात कही है और वह भी पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के सामने। भारत ने तब उनकी मध्यस्थता से साफ मना किया था और बुधवार को भी विदेश मंत्रालय ने मध्यस्थता की किसी भी संभावना से साफ इनकार किया है, लेकिन भारत की चिंता यह नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार मध्यस्थता की रट लगाए हुए हैं, बल्कि यह है कि उनके इस रवैये से आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर बनाया गया दबाव कम हो सकता है।

कश्मीर पर भारत तीसरे पक्ष की मदद लेने को तैयार नहीं

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कश्मीर पर भारत का स्टैंड पुराना है और यह सभी को मालूम है। हम इस मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मदद लेने को तैयार नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी ने सितंबर, 2019 में न्यूयार्क में राष्ट्रपति ट्रंप के सामने यह बात साफ तौर पर कह दी थी। उस मुलाकात के ठीक पहले ट्रंप ने ना सिर्फ कश्मीर पर मध्यस्थता करने की बात कही थी बल्कि यह भी दावा किया था कि स्वयं पीएम मोदी ने उनसे मध्यस्थता करने को कहा है।

ट्रंप के अगले महीने दिल्ली आने को लेकर भारत ने दी ठंडी प्रतिक्रिया

यही वजह है कि जब मंगलवार को खान व ट्रंप के बीच मुलाकात में कश्मीर का जिक्र किया गया तो भारत ने इस पर कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत की इस ठंडी प्रतिक्रिया की एक वजह यह भी माना जा रही है कि ट्रंप के अगले महीने नई दिल्ली आने की संभावना है।

अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति बदला नजरिया

इस ठंडी प्रतिक्रिया के बावजूद भारत की चिंता कम नहीं है। जिस तरह से राष्ट्रपति मोदी ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते को मजबूत बनाने, पाकिस्तान के साथ कारोबार करने की बात कही है वह बताता है कि अमेरिका का नजरिया बदला है।

ट्रंप व खान की मुलाकात के बाद पाक विदेश मंत्री ने की अमेरिका की यात्रा

ट्रंप व खान के बीच मुलाकात से कुछ ही दिन पहले विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने अमेरिका की यात्रा की है। पाक के उद्यमियों का एक दल भी शीघ्र ही अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर जाने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति व खान की मुलाकात के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तान व ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों के बीच हुई वार्ता में भी कश्मीर के साथ द्विपक्षीय कारोबार का मुद्दा उठा है।

यूएस जिस तरह आतंक पोषित पाक में रुचि दिखा रहा उससे कई देश ट्रंप से किनारा कर सकते हैं

जानकार मान रहे हैं कि अमेरिका जिस तरह से पाकिस्तान में रुचि दिखा रहा है उसे देखते हुए वैसे देश जो आतंकवाद को प्रश्रय देने के मुद्दे पर पाक से दूरी बना रहे थे वे भी रिश्तों पर पुनर्विचार कर सकते हैं। इससे आतंकवाद के मुद्दे पर पाक पर दबाव बनाने की रणनीति को धक्का लग सकता है।

अमेरिका के रुख में आये बदलाव के लिए नई ईरान नीति को माना जा रहा

अमेरिका के रुख में आये बदलाव के लिए मुख्य तौर पर उसकी नई ईरान नीति को माना जा रहा है। अगर खाड़ी में फिर युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो अमेरिका को पाकिस्तान के सैन्य अड्डों की जरुरत होगी। यही वजह है कि ईरान के जनरल सोलेमानी की हत्या के दिन अमेरिका के विदेश सचिव माइकल पोम्पिओ ने पाक सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को फोन किया था।

Posted By: Bhupendra Singh

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