नई दिल्ली, एएनआई: केंद्रीय केमिकल फर्टिलाइजर मंत्री मनसुख मंडाविया ने देश में फर्टिलाइजर की कमी से इनकार किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा और साल 2025 तक देश में यूरिया का पर्याप्त उत्पादन होगा।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, मंडाविया ने कहा कि देश में सालाना लगभग 3.25-3.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खपत का अनुमान है। वहीं खरीफ के सीजन में करीब 1.80 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होने का अनुमान है। अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन के लिए 1.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन किया जाएगा। वहीं, शेष 30 लाख मीट्रिक टन यूरिया की व्यवस्था पहले ही विभिन्न देशों से की जा चुकी है।

इस दौरान उन्होंने साफ किया कि देश में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। मंडाविया ने कहा कि फर्टिलाइजर की अभूतपूर्व वैश्विक कमी के बावजूद भारत में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। वहीं, उन्होंने बताया कि देश की केंद्र सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है, जिसके प्रत्यक्ष लाभ से देश में 20 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की खपत कम होगी।

केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय विभाग के अधिकारी ने एएनआई को बताया कि हाल ही में मंडाविया के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 13-15 मई तक जार्डन का दौरा किया था। उन्होंने बताया कि यह महत्वपूर्ण यात्रा पूरे विश्व में चल रही वैश्विक उर्वरक संकट की पृष्ठभूमि में हुई है। जिसका स्पष्ट उद्देश्य उर्वरकों और कच्चे माल को अल्प और दीर्घकालिक दोनों के लिए सुरक्षित करना था। उन्होंने बताया कि भारत और जार्डन की कंपनियों के बीच 30 लाख टन राक फास्फेट आयात का समझौता किया गया है, जिससे डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) का उत्पादन किया जाएगा। समझौते के तहत तीनन लाख टन पोटाश, 2.5 लाख टन डीएपी और एक लाख टन फास्फेटिक एसिड का आयात किया जाएगा। यह समझौता अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगा।

Edited By: Amit Singh