नई दिल्ली, एएनआइ। मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। उन्हें गिरीश चंद्र मुर्मू के इस्तीफे के बाद जम्मू कश्मीर का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस बीच जम्मू कश्मीर के नए उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद मनोज सिन्हा जम्मू कश्मीर पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू का इस्तीफा मंजूर कर लिया, जिसके बाद मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर का नया उपराज्यपाल बनाया गया।

इससे पहले केंद्र सरकार ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को गिरीश चंद्र मुर्मू की जगह जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल के रूप में नियुक्त किया। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने केंद्र शासित राज्य के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू के इस्तीफे को स्वीकार करने के बाद मनोज सिन्हा को इस पद पर नियुक्त किया है। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन होने के बाद बीते साल 31 अक्टूबर को मुर्मू ने उपराज्यपाल का पद संभाला था।

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अजय कुमार सिंह द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, मनोज सिन्हा की नियुक्ति उनके कार्यालय के कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से लागू होगी।

रेल राज्यमंत्री रह चुके हैं मनोज सिन्हा

बीजेपी नेता मनोज सिन्हा मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रेल राज्यमंत्री रह चुके हैं। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने गाजीपुर से चुनाव लड़ा था लेकिन वह नहीं जीत सके थे। गठबंधन के बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार अफजाल अंसारी से उन्हें 119,392 वोटों से हरा दिया था। 2014 के चुनाव में भी सिन्हा ने समाजवादी प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाहा को 32,452 वोटों से हराया था। 2014 में मनोज सिन्हा को कुल 306,929 वोट मिले थे।

उमर अब्दुल्ला का ट्वीट

मनोज सिन्हा के उपराज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा- कल रात एक या दो नाम थे, जिनके नाम सामने आए थे और इनका नाम उनके बीच नहीं था। आप इस सरकार पर हमेशा भरोसा कर सकते हैं कि ये स्रोतों से पहले लगाए गए किसी भी कयास के विपरीत  अप्रत्याशित नाम सामने आता है।

मुर्मू के इस्तीफे से मचा हड़कंप !

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 के हटाए जाने की पहली वर्षगांठ पर बुधवार देर शाम, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू(Girish Chandra Murmu) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मुर्मू के इस्तीफे की खबर से प्रशासन खेमे से लेकर सियासी पार्टियों में ह़़डकंप मंच गया। मुर्मू ने देर रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इस्तीफा भी सौंप दिया था। वहीं, मुर्मू के इस्तीफे का कारणों का पता नहीं चला, लेकिन अफवाहें हैं कि कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों के कामकाज से वह खफा थे। सूत्रों के अनुसार, मुर्मू की केंद्र में किसी बड़े ओहदे पर नियुक्ति हो सकती है।

सभी कार्यक्रम रद किए

मुर्मू के इस्तीफे की खबर शाम को सूर्यास्त के साथ ही फैली। इससे पूर्व उन्होंने श्रीनगर में दोपहर से लेकर शाम तक निर्धारित सभी कार्यक्रम रद कर दिए। उन्होंने दिल्ली से आए मीडियाकíमयों के अलावा अन्य उच्चस्तरीय प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक को भी रद कर दिया। दोपहर करीब 12 बजे के बाद किसी से कोई भेंट नहीं की। इसके बाद वह जम्मू में ही रहे जहां उन्होंने उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी के साथ मुलाकात करने के अलावा प्रशासनिक परिषद की बैठक में हिस्सा लिया। 

मुर्मू के करीबियों की मानें तो वह बीते कुछ दिनों से लगातार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रहे थे। नागरिक सचिवालय और स्थानीय हलकों में जारी चर्चाओं को अगर सही माना जाए तो जम्मू-कश्मीर प्रशासन में कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ उनकी पटरी नहीं बैठ रही थी। इस मसले पर उन्होंने कथित तौर पर दिल्ली में गृहमंत्री और प्रधानमंत्री से भी चर्चा की थी। जीसी मुर्मू के इस्तीफे की चर्चा कई दिनों से चल रही थी।

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