नई दिल्ली, प्रेट्र। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पाकिस्तान में करतारपुर कॉरिडोर के औपचारिक उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे, लेकिन वह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ श्रद्धालुओं के पहले जत्थे में शामिल होकर करतारपुर जाएंगे और उसी दिन वापस भी आ जाएंगे।

इमरान खान नौ नवंबर को करेंगे करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के इस दावे के बाद कि पूर्व प्रधानमंत्री ने उद्घाटन समारोह में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है, रविवार को सूत्रों ने यह जानकारी दी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नौ नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे।

शाह ने कहा- मनमोहन ने न्योता स्वीकार कर लिया

शाह ने शनिवार को मुल्तान में कहा था कि मनमोहन सिंह ने उनका न्योता स्वीकार कर लिया है, लेकिन वह समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर नहीं बल्कि एक आम आदमी की तरह शिरकत करेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री ने भी शाह को पत्र लिख कर अपने फैसले की जानकारी दे दी है।

पाकिस्तान दुनियाभर के सिखों के लिए दरवाजे खोलने के लिए तैयार है

वहीं, इमरान ने रविवार को अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'पाकिस्तान दुनियाभर के सिखों के लिए अपने दरवाजे खोलने के लिए तैयार है, क्योंकि करतारपुर प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और नौ नवंबर, 2019 को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।'

गुरदासपुर में पीएम मोदी आठ नवंबर को करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक में आठ नवंबर को इस गलियारे का उद्घाटन करेंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तीन अक्टूबर को करतारपुर कॉरिडोर उद्घाटन के लिए पाकिस्तान जाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह केवल करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने वाले पहले सर्वदलीय जत्थे का नेतृत्व करेंगे।

वीजा मुक्त है करतारपुर कॉरिडोर

करतारपुर कॉरिडोर वीजा मुक्त है। भारत के गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा और करतारपुर स्थित दरबार साहिब गुरुद्वारे को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर से जाने वाले श्रद्धालुओं को वीजा नहीं लेना पड़ेगा। उन्हें सिर्फ परमिट लेने से ही इस रास्ते से जाने की अनुमति मिल जाएगी।

पाकिस्तान हर श्रद्धालु से लेगा 20 डॉलर

भले ही यह गलियारा वीजा मुक्त है, लेकिन पाकिस्तान ने इस रास्ते से जाने वाले हर श्रद्धालु से शुल्क के रूप में 20 डॉलर (लगभग 1400 रुपये) लेने का फैसला किया है। भारत ने कई बार उससे यह शुल्क नहीं लेने का अनुरोध किया है, पर वह मान नहीं रहा।

Posted By: Bhupendra Singh

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