नई दिल्‍ली, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश में पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर पक्ष-विपक्ष ने एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि आरएसएस को छोड़कर देश के सभी एनजीओ को बैन कर देना चाहिए। इस पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। किरण रिजिजू ने राहुल गांधी को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मओवादियों को लेकर की गई घोषणा की याद दिलाई है। भीमा कोरेगांव केस में माओवादी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने घोषित किया था कि भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए माओवादी सबसे बड़ा खतरा हैं। अब कांग्रेस अध्यक्ष(राहुल गांधी) खुले तौर पर माओवादी संगठनों से सहानुभूति दिखा रहे हैं, उनका समर्थन कर रहे हैं। हमें राजनीति से ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा को रखना चाहिए।

देश के कई हिस्‍सों में एक साथ छापे के बाद माओवादियों के संबंध रखने के आरोप में कई जाने-माने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और आरएसएस पर निशाना साधा है। उन्‍होंने कहा कि यह न्‍यू इंडिया है। यहां सिर्फ एक ही एनजीओ के लिए स्‍थान है- राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ, जो कि भाजपा का वैचारिक सलाहकार है। राहुल गांधी ने भीमा कोरेगांव हैसटैग के साथ ट्वीट कर कहा, 'देश में सिर्फ एक एनजीओ के लिए स्‍थान है जिसे आरएसएस कहा जाता है। अन्‍य सभी एनजीओ को बंद कर दो। जो शिकायत करते हैं उन्‍हें जेल भेज दो और गोलियों से उड़ा दो। न्‍यू इंडिया में आपको स्‍वागत है।'

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश के सिलसिले में पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश के छह राज्यों में छापे मारकर पांच माओवादी कार्यकर्ताओं को पकड़ा है। इन सभी को इसी साल जून में गिरफ्तार किए जा चुके पांच माओवादियों से पूछताछ के आधार पर पकड़ा गया है। सभी पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन और नक्सलियों से रिश्ते का आरोप है। पुणे पुलिस ने मंगलवार को मुंबई और ठाणे के साथ-साथ फरीदाबाद, रांची, गोवा और हैदराबाद में भी छापे मारे। इस छापेमारी में हैदराबाद से वामपंथी रझान के कवि वरवरा राव, फरीदाबाद से एडवोकेट सुधा भारद्वाज, दिल्ली से गौतम नवलखा, मुंबई से वर्णन गोंसाल्विस एवं ठाणे से एडवोकेट अरुण परेरा को गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि इसी वर्ष एक जनवरी को पुणे के समीप भीमा कोरेगांव दंगे की पूर्व संध्या 31 दिसंबर को शनिवारवाड़ा के बाहर अजा-जजा कार्यकर्ताओं द्वारा यलगार परिषद का आयोजन किया गया था। इसी दौरान मुंबई और कल्याण से कई माओवादी कार्यकर्ता पकड़े गए थे। जिनसे पूछताछ में भीमा कोरेगांव दंगे में माओवादी साजिश का पता चला था। भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच के दौरान पुणे पुलिस ने इसी साल जून में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इन पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से संबंध रखने का आरोप है। तब सुधीर धवले, वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राउत, शोमा सेन और रोना विल्सन को मुंबई, नागपुर एवं दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

Posted By: Tilak Raj