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फ्रीज हुआ नाम, छिन गया निशान: 72 घंटे तक लगते रहे झटके, ममता बनर्जी के इम्तिहान की पूरी इनसाइड स्टोरी

Published: Sun, 20 Sep 2026 02:10 AM (IST)

पश्चिम बंगाल में कभी अजेय मानी जाने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पिछले 72 घंटों में असामान्य उतार-चढ़ाव ...और पढ़ें

नंदीग्राम में कैंडिडेट न होने पर ममता ने किया कांग्रेस का समर्थन (फोटो- पीटीआई)

नंदीग्राम में कैंडिडेट न होने पर ममता ने किया कांग्रेस का समर्थन (फोटो- पीटीआई)

HighLights

  1. रेजीनगर में उम्मीदवार का वापस आना थोड़ी राहत वाली बात

  2. नंदीग्राम में कैंडिडेट न होने पर ममता ने किया कांग्रेस का समर्थन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कभी अजेय मानी जाने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पिछले 72 घंटों में असामान्य उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। पार्टी की पहचान, नेतृत्व और संगठनात्मक एकता पर सवाल उठे हैं।

दिन 1: चुनाव आयोग ने फ्रीज किया नाम और सिंबल

चुनाव आयोग ने ममता गुट और अरुप रॉय के विरोधी गुट के बीच विवाद के चलते टीएमसी का पारंपरिक नाम और फूल वाला सिंबल फ्रीज कर दिया।

यह तकनीकी झटका तो था ही, लेकिन पार्टी की चुनावी पहचान के लिए बड़ा आघात भी साबित हुआ। विधानसभा चुनाव में बीजेपी से हार के बाद पार्टी पहले ही विद्रोह और विभाजन के खतरे से जूझ रही थी।

दिन 2: नया नाम-सिंबल और नंदीग्राम में झटका

अगले दिन चुनाव आयोग ने ममता गुट को ‘फुटबॉलर’ सिंबल और ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया। विरोधी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ सिंबल मिला।

इसी दिन नंदीग्राम में टीएमसी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने बीजेपी नेता और नंदीग्राम से ममता को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया।

इसके बाद ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया और कांग्रेस को बहन पार्टी बताया। लेकिन कुछ घंटों बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया। ममता गुट ने बीजेपी सरकार पर दमन का आरोप लगाया।

दिन 3: रेजीनगर में डर फिर राहत

 

रेजीनगर में टीएमसी उम्मीदवार और पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी ने पहले नामांकन वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने में कठिनाई, पुलिस की कार्रवाई और नए फुटबॉलर सिंबल को पहचान दिलाने की समस्या का हवाला दिया।

लेकिन करीब डेढ़ घंटे बाद उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया। चौधरी ने कहा कि मैं उपचुनाव लड़ूंगा। हम दीदी की पार्टी में हैं और उनके आदेश के बाहर कुछ नहीं कर सकते।

उन्होंने बताया कि ममता के निर्देश पर उन्होंने उम्मीदवारी बरकरार रखी। पुलिस ने सुरक्षा का आश्वासन भी दिया। इन तीन दिनों की घटनाओं ने ममता और उनकी पार्टी के लिए अशांत रोलरकोस्टर साबित किया, हालांकि रेजीनगर में उम्मीदवार का वापस आना थोड़ी राहत लेकर आया