रुमनी घोष, नई दिल्ली। महाराष्ट्र में चल रहे सियासी घमासान के बीच पल-पल स्थितियां बदल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में परम्यूटेशन और कांबिनेशन यानी कई तरह के समीकरण बनाए जा रहे हैं। ऐसे में दैनिक जागरण ने संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप से चर्चा की। उनके अनुसार तीन तरह की स्थितियां बन सकती हैं और तीनों ही परिस्थिति में संबंधित पक्ष को सदन में अपना बहुमत साबित करना होगा।

समीकरण नंबर एक

- शिवसेना के ज्यादातर सदस्य यदि एकनाथ शिंदे के साथ हैं तो शिवसेना मुख्यमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति को बदल सकती है। उद्धव ठाकरे इस्तीफा दे सकते हैं और उनकी जगह पर शिवसेना एकनाथ शिंदे या किसी और को (जिसे पार्टी के सदस्य समर्थन दें) अपना नेता चुन सकती है। ऐसे में सत्ता पर शिवसेना बनी रहेगी।

समीकरण नंबर 2

- एकनाथ शिंदे अपनी नई पार्टी बनाकर सदन में बहुमत सिद्ध कर सत्ता में आ सकते हैं। शिंदे भाजपा सहित किसी भी दल से समर्थन ले सकते हैं। हालांकि, सदन में बहुमत साबित करना जरूरी है।

समीकरण नंबर 3

-एकनाथ शिंदे अपने विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो सकते हैं और भाजपा सदन में बहुमत साबित कर सत्ता में आ सकती है। यदि शिंदे विधायकों के साथ भाजपा में शामिल नहीं होते हैं (जैसे गुवाहाटी में कहा है ) तो भी बाहर से भाजपा को समर्थन दे सकते हैं ।

अभी तो यह पार्टी का मामला है

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन का कहना है बेशक इस घटनाक्रम पर देश की नजर लगी हुई है, लेकिन अभी तक यह पार्टी का अंदरूनी मामला है। चाहे उद्धव ठाकरे हो या बागी विधायक एकनाथ शिंदे दोनों को ही अपना-अपना बहुमत साबित कर अगला कदम उठाना होगा। उसके बाद ही राज्यपाल की भूमिका आएगी।

बंद मुट्ठी नहीं खोलेंगे उद्धव ठाकरे और भाजपा भी सोच-समझकर ही दांव खेलेगी

मप्र विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवान देव इसरानी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में अगली चाल एकनाथ शिंदे को ही चलना होगा। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यदि अल्पमत में आ भी गए होंगे तो वह बंद मुट्ठी नहीं खोलेंगे। यदि भाजपा समर्थन और सरकार बनाने की स्थिति को लेकर पूरी तरह यकीन होता तो वह अब तक दावा पेश कर चुकी होती। हालांकि पिछली बार के अनुभव से सीख लेते हुए संभवत: भाजपा आगे आकर दावा पेश नहीं करेगी। ऐसे में मुख्य किरदार एकनाथ शिंदे ही हैं। शिंदे ही राज्यपाल के पास आवेदन देंगे। चाहे वह खुद सरकार बनाने का हो या फिर किसी अन्य दल को समर्थन देने का। इसके बाद राज्यपाल की भूमिका सामने आएगी। विधायकों की संख्या के आधार पर वह संबंधित दल को बहुमत साबित करने के लिए आमंत्रण दे सकते हैं।

सदन की कार्रवाई 

दो तिहाई विधायक होने पर दल-बदल कानून नहीं होगा लागू

नियम अनुसार यदि शिंदे के पास दो-तिहाई बहुमत है तो पार्टी से बगावत करने की स्थिति में भी दल-बदल कानून लागू नहीं होगा। ऐसे में बागी विधायकों का दल अपनी पार्टी बना सकता है। उन्हें सदन में मान्यता होगी और वह किसी भी दल को अपना समर्थन दे सकते है।

विधानसभा भंग नहीं करेंगे, बहुमत साबित करने बुला सकते हैं राज्यपाल

संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थितियों में महाराष्ट्र के राज्यपाल विधानसभा भंग नहीं करेंगे। वह राजनीतिक दलों से बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं और वह कोई भी दल हो सकता है।

उप्र में सदन में बैलेट रखवाए गए थे

सुभाष कश्यप कहते हैं बीते तीस वर्ष में ऐसी स्थितियां कई बार बनी हैं, लेकिन एक घटना काफी महत्वपूर्ण थी। वर्ष 1991 से लेकर 2006 के बीच उप्र में गठबंधन की सरकारें रहीं। इस दौरान सरकारों को कई बार ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ा। एक बार तो ऐसा मौका आया, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सदन में बैलेट बाक्स रखवाए गए और गोपनीयता के साथ बहुमत परखा गया।

महाराष्ट्र विधानसभा का अंकगणित

महाविकास आघाड़ी -

शिवसेना - 55

राकांपा - 53

कांग्रेस - 44

(कुल विधायक - 152)

भाजपा - 106

छोटी पार्टियां एवं निर्दलीय

बहुजन विकास आघाड़ी - 03

समाजवादी पार्टी - 02

प्रहार जनशक्ति पार्टी - 02

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना - 01

जन सुराज्य पार्टी - 01

राष्ट्रीय समाज पक्ष - 01

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) - 01

निर्दलीय - 16

Edited By: Arun Kumar Singh