यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 01, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र तीन-चार जुलाई को, स्पीकर के लिए कल होगा नामांकन
महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ लेने के बाद एकनाथ शिंदे सक्रिय हो गए है। इसके साथ ही 3-4 जुलाई ...और पढ़ें

मुंबई, एजेंसी। महाराष्ट्र में नई सरकार के शपथग्रहण के बाद शिवसेना अब अपने 39 बागी विधायकों के निलंबन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। अपनी याचिका में शिवसेना ने एकनाथ शिंदे को भी निलंबित करने की मांग की है। वहीं महाराष्ट्र विधायिका का दो दिवसीय विशेष सत्र 3 जुलाई से होगा। सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा। सूत्रों ने बताया कि सत्र के दौरान विश्वास मत भी हो सकता है।
महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र तीन और चार जुलाई को बुलाया जाएगा। दो जुलाई को स्पीकर चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया जाएगा, जबकि तीन जुलाई को मतदान होगा। वहीं विश्वास मत चार जुलाई को होगा।
एकनाथ शिंदे ने पद संभालते ही प्रशासनिक काम भी शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिंदे ने महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल को आदेश दिए हैं कि मेट्रो कार शेड आरे में ही बनाया जाएगा, इस बारे में अदालत के सामने सरकार का पक्ष रखा जाए। अधिकारियों को इस बात के आदेश भी दिए हैं कि जलयुक्त शिवर योजना को पुनः शुरू करने के लिए जल्दी ही प्रस्ताव लाया जाए।
बता दें कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे नेतृत्व के खिलाफ नौ दिनों के विद्रोह के बाद गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले एकनाथ शिंदे ने खुद को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में पेश करने का संकेत दिया। उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह के ठीक बाद शिंदे ने अपने ट्विटर हैंडल की प्रोफाइल तस्वीर को बाला साहेब ठाकरे के साथ की एक फोटो से बदल दिया।
सीएम एकनाथ शिंदे के साथ कैबिनेट की बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि हमारे पास फिर आपके साथ काम करने का अवसर है। आइए महाराष्ट्र को गतिशीलता और निर्णय लेने की क्षमता के साथ आगे ले जाने का प्रयास करें।
शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वे ही असली सेना हैं। उनका तर्क है कि उद्धव ठाकरे ने शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके बाल ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को कमजोर किया है और ये "अप्राकृतिक गठबंधन" है।
गौरतलब है कि राज्य में कई दिनों से राजनीतिक उथलपुथल के हालात थे। शिवसेना के दो तिहाई से ज्यादा विधायक पहले मुंबई से सूरत गए और वहां से फिर उन्हें गुवाहाटी भेज दिया गया। ये सभी विधायक उद्धव ठाकरे सरकार का विरोध कर रहे थे। इनकी मांग थी कि उद्धव ठाकरे महाअघाड़ी सरकार से बाहर आएं।
