मुंबई, एजेंसी/ब्‍यूरो। Maharashtra Government Formation महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने भाजपा विधायक दल के नेता देवेंद्र फड़नवीस को सरकार बनाने का निमंत्रण भेजा है। शनिवार आधी रात को राज्य विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से बमुश्किल चार घंटे पहले राज्यपाल ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर यह बताने के लिए कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में सरकार बनाने की इच्‍छुक है या नहीं... वहीं शिवसेना ने कहा है कि यदि कोई सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं है तो शिवसेना इसका जिम्‍मा संभाल सकती है। इस मसले पर शाम को भाजपा फ‍िर बैठक करने वाली है। 

निरूपम ने संजय राउत का दिखाया आईना 

इन सबके बीच, महाराष्‍ट्र कांग्रेस प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे Mallikarjun Kharge ने रविवार को पार्टी के 44 विधायकों के साथ बैठक की जो जयपुर स्थित एक रिजॉर्ट में ठहरे हैं। समाचार एजेंसी आइएएनएस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कांग्रेस ने अपने सारे विकल्‍प खुले रखे हैं। वहीं एएनआइ के मुताबिक, कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने संजय राउत (Shiv Sena leader Sanjay Raut) को आईना दिखा दिया है। निरूपम ने कहा है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी सरकार महज कल्पना है। यदि हम वह कल्पना साकार करना चाहते हैं तो इसके लिए शिवसेना से समर्थन लेना होगा। यदि हम शिवसेना का समर्थन लेते हैं तो यह कांग्रेस के लिए बेहद घातक कदम होगा।

...तो हम बनाएंगे सरकार: शिवसेना 

शिवसेना नेता संजय राउत (Shiv Sena leader Sanjay Raut) ने कहा कि अगर कोई सरकार बनाने को तैयार नहीं है तो हम यह जिम्‍मा संभाल सकते हैं। यही नहीं राउत ने कांग्रेस से भी नजदीकी के संकेत दिए। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस राज्‍य की दुश्‍मन नहीं है। सभी पार्टियों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं। गौरतलब है कि राज्‍यपाल द्वारा भाजपा को सरकार बनाने का न्‍यौता देने के बाद से राज्‍य में सियासी सरगर्मी एकबार फ‍िर तेज हो गई है। वहीं राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा है कि राज्यपाल का निर्णय देर से आया है। 

विधायकों के साथ बैठक कर रहे उद्धव 

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी विधायक दल की बैठक में भाग लेने के लिए होटल रिट्रीट पहुंचे हैं। शिवसेना के सभी विधायक वहीं मौजूद हैं। राज्‍य में जारी इसी सियासी सरगर्मी के बीच रविवार को मुंबई में ऐसे पोस्‍टर नजर आए जिनमें उद्धव को महाराष्‍ट्र का सीएम बनाने की मांग की गई है। दूसरी ओर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी अपने विधायकों की मंगलवार को बैठक बुलाई है। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि यदि भाजपा और शिवसेना मिलकर सरकार बना लेते हैं तो हम विपक्ष में बैठेंगे। हम मंगलवार को अपने विधायकों के साथ राज्‍य के सियासी हालात पर चर्चा करेंगे। 

कांग्रेस ने मांगा सरकार बनाने का न्‍यौता 

इस बीच मिलिंद देवड़ा ने भी राज्यपाल से कांग्रेस-एनसीपी को सरकार बनाने का न्योदा देने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, भाजपा और शिवसेना ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया है, ऐसे में राज्यपाल को सूबे के दूसरे सबसे बड़े गठबंधन राकांपा और कांग्रेस को सरकार बनाने का न्यौता देना चाहिए। दूसरी ओर शिवसेना ने एनसीपी से नजदीकी बढ़ाने के संकेत दिए हैं। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एनसीपी प्रमुख शरद पवार की तारीफ की है। सामना में कहा गया है कि राज्‍य में सरकार के गठन में दिग्‍गज नेता शरद पवार की भूमिका बेहद महत्‍वपूर्ण हो सकती है।

भाजपा का मंथन लेकिन फैसला नहीं 

इस बीच देवेंद्र फडणवीस के आवास पर भाजपा कोर कमेटी की बैठक शुरू हुई। बैठक के बाद भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार Sudhir Mungantiwar ने कहा कि राज्‍यपाल ने भाजपा को इसलिए सरकार बनाने का न्‍यौता दिया है क्‍योंकि चुनाव में वह सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। सरकार बनाना है या नहीं इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। हम शाम को  दोबारा मिलेंगे और गवर्नर के बुलावे पर फैसला लेंगे। सनद रहे कि महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर को समाप्त हो गया है। 

कांग्रेस ने राजस्‍थान भेजे विधायक 

वहींं खरीद-फरोख्त की आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के अपने 34 विधायकों को राजस्थान भेज दिया है। बीते दिनों कांग्रेस ने विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया था। कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में विधायकों को पार्टी बदलने के लिए 25 करोड़ से 50 करोड़ रुपए तक की पेशकश की जा रही है। दूसरी ओर शिवसेना भी अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका से सचेत है। 

शिवसेना कर रही दावा 

महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजे 24 अक्‍टूबर को जारी हुए थे, लेकिन कल तक किसी भी दल या गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया था। यही वजह है कि राज्यपाल ने सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशने के लिए 105 सीटें जीतनेवाली सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने के लिए न्‍यौता दिया है। हालांकि, 56 सीटें जीतने वाली शिवसेना 170 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है। 

दो बार रहा राष्ट्रपति शासन 

महाराष्‍ट्र के 59 वर्षों के सियासी इतिहास में केवल दो बार राष्ट्रपति शासन रहा है। सन 1980 में फरवरी से जून और बाद में साल 2014 में सितंबर से अक्टूबर तक महज 33 दिन तक राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था। विश्‍लेषकों की मानें तो भाजपा यदि सरकार बनाने से इंकार कर देती है, तो राज्यपाल के पास दूसरे सबसे बड़े दल, यानी शिवसेना को सरकार बनाने के लिए बुलाना पड़ेगा। साथ चुनाव लड़ने वाली भाजपा और शिवसेना के अपनी शर्तों पर अड़ने के कारण राज्‍य में सरकार का गठन अभी नहीं हो पाया है। शिवसेना सीएम पद पर 50-50 का फॉर्मूला चाहती है वहीं भाजपा इस पद को लेकर किसी समझौते के मूड में नहीं है। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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