राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना के अंदर वर्चस्व की लड़ाई तेज होने के साथ ही मान मनौव्वल और धमकाने, डराने का दौर भी चल रहा है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विद्रोही विधायकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे मुंबई लौट आएं और उनके सामने बैठकर बात करें। परंतु, उन्हीं की पार्टी के सांसद संजय राउत ने विद्रोहियों को फिर धमकाया है और उन्हें जाहिल, चलती-फिरती लाश करार देते हुए कहा है कि 'गद्दार' सड़कों पर खुले नहीं घूम सकते। मुंबई के पुलिस आयुक्त ने भाजपा के तीन विधायकों के साथ बैठक की और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा की।

विद्रोही विधायकों को भावुक पत्र

उद्धव ठाकरे ने विद्रोही विधायकों को भावुक पत्र लिखा है। उसकी शुरुआत उन्होंने, 'शिवसैनिक विधायक भाइयों एवं बहनों जय महाराष्ट्र!' से की है। उन्होंने आगे लिखा है, 'शिवसेना प्रमुख होने के नाते आप लोगों की मुझे चिंता है। आप में से कई लोग तो आज भी हमारे संपर्क में हैं और मन से शिवसैनिक भी हैं। आपमें से कइयों के परिवार ने हमसे संपर्क करके आपकी भावनाएं हम तक पहुंचाई हैं। शिवसेना प्रमुख होने के नाते मैं आपकी भावनाओं की कद्र करता हूं।'

शिवसेना का मुखिया होने के नाते सभी की चिंता

उद्धव ने पत्र में कहा है, 'परिवार का मुखिया होने के नाते मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अभी भी समय गया नहीं है। आप आकर मेरे सामने बैठें तथा शिवसैनिकों एवं जनता के मन में चल रहे भ्रम को दूर करें। इससे निश्चित रूप से रास्ता निकलेगा। आप किसी के भी बहकावे में न आएं। जो मान सम्मान आपको शिवसेना में मिला है, वह और कहीं नहीं मिल सकता।'

राउत ने विद्रोही विधायकों के हिंदुत्व पर उठाए सवाल

अलीबाग की रैली में संजय राउत ने विद्रोही विधायकों को धमकाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में उनका कोई काम नहीं है। वे 11 जुलाई तक गुवाहाटी में रहें। उन्होंने कहा कि जो विद्रोही विधायक बालासाहब ठाकरे के ¨हदुत्व को बचाने की बात कर रहे हैं, उनमें से 22 तो राकांपा से शिवसेना में आए थे। वे किस ¨हदुत्व की बात कर रहे हैं।

उद्धव के भावनात्मक पत्र का शिंदे ने दिया जवाब

विद्रोही विधायकों के नाम उद्धव के भावनात्मक पत्र का शिंदे ने ट्वीट कर जवाब दिया है। उन्होंने लिखा है, एक तरफ उनके पुत्र और प्रवक्ता बाला साहब के शिवसैनिकों को नाली की गंदगी, रास्ते का रोड़ा, कुत्ता, जाहिल और मृत देह करार दे रहे हैं। दूसरी ओर ¨हदू विरोधी महा विकास आघाड़ी सरकार बचाने के लिए विधायकों को साथ आने का आह्वान किया जा रहा है। इसका मतलब क्या है?

शिंदे ने 50 विधायकों के समर्थन का किया दावा

गुवाहाटी में जमे विद्रोही गुट के नेता एकनाथ शिंदे ने 50 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। शिंदे ने कहा कि वे लोग जल्द ही मुंबई लौटेंगे और बालासाहब ठाकरे की विरासत को आगे ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि विधायकों में कोई मतभेद नहीं है। सभी अपनी मर्जी से उनके साथ आए हैं, और खुश हैं।

शिवसेना 20 विधायकों के संपर्क में होने का कर रही दावा

शिवसेना के शीर्ष नेता कह रहे हैं विद्रोही गुट के 20 विधायक उनके संपर्क में हैं। खुद शिवसेना प्रमुख व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कई विधायकों के संपर्क में होने की बात कही है। इस पर शिंदे ने शिवसेना नेताओं से उनके संपर्क करने वाले विधायकों का नाम उजागर करने को कहा है।

गुवाहाटी का कोई विधायक शिवसेना के संपर्क में नहीं : सामंत

शिंदे के साथ रह रहे उदय सामंत ने कहा कि गुवाहाटी में रहने वाला कोई भी विधायक मुंबई में किसी भी शिवसेना नेता के संपर्क में नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी तरह का भ्रम नहीं है। हम सभी यहां स्वेच्छा से आए हैं।

शिंदे के समर्थन पर ठाणे के दो नेता पार्टी से निकाले गए

एकनाथ शिंदे का समर्थन करने पर ठाणे में शिवसेना के दो नेताओं को पार्टी से निकाल दिया गया है। इनमें ठाणे की पूर्व मेयर व शिवसेना की जिला समन्वयक मीनाक्षी शिंदे और एक अन्य पूर्व मेयर नरेश महास्के शामिल हैं। शिवेसना की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।

सुप्रिया सुले ने भी की अपील

उद्धव द्वारा यह पत्र लिखे जाने के बाद राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की पुत्री एवं सांसद सुप्रिया सुले ने भी विद्रोही विधायकों से मुंबई आने और बातचीत करने की अपील की है। उन्होंने राकांपा से शिवसेना में गए विधायकों पर निशाना भी साधा है, जो अब राकांपा की आलोचना कर रहे हैं और कहा है कि यह ठीक नहीं है। एक सवाल पर सुले ने कहा कि सरकार का विरोध करने पर ईडी का नोटिस मिल जाता है।

Edited By: Krishna Bihari Singh