इंदौर, राज्य ब्यूरो। लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता सुमित्रा महाजन ने कहा कि इंदौर का स्वभाव ऐसा है कि जब भी शहर का विकास करने हम निकलते हैं, तब हम पार्टी पॉलिटिक्स मन में नहीं रखते हैं। हम यही सोचते हैं कि अपने शहर का विकास करना है। ये मेरा अनुभव है। राज्य में मेरी सरकार थी तो मैं खिलाफ नहीं बोल सकती थी, लेकिन मुझे इंदौर के लिए जब वह मुद्दा जरूरी लगता था तो धीरे से विपक्ष (कांग्रेस) के साथियों को कहती थी कि कुछ करो।

माफ करना, आज मैं बोल रही हूं- सुमित्रा महाजन

माफ करना, आज ये बोल रही हूं, लेकिन इन लोगों से कहती थी कि भैया कुछ करो, फिर मैं ऊपर तक बात करूंगी। शिवराजजी से बात करके करवा लूंगी, लेकिन शहर हित में इस मुद्दे को उठाओ। इन लोगों ने भी मेरी बात मानी और शहर हित के लिए मुद्दे उठाए।

विधायक बन गए हैं तो केवल नेतागीरी नहीं

वह मध्य प्रदेश के इंदौर में कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी द्वारा राज्यपाल लालाजी टंडन के साथ आयोजित 'संवाद-विमर्श' कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि कैसे विकास करना, कैसे राजनीति में अभ्यास करना है, ये बच्चे जो यहां बैठे हैं और विधायक बन गए हैं, उन्हें सीखना चाहिए। विधायक बन गए हैं तो केवल नेतागीरी नहीं। जब आपको विधानसभा में बोलना हो तो अभ्यास करके विषय पर बोलना चाहिए। राजनीति कैसी करो, अपने शहर का इतिहास कैसे जानो और अपने शहर का विकास कैसे करो, सबकी मदद करते हुए आगे कैसे बढ़ना है, यह महामहिम से हम सीख सकते हैं।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट मौजूद थे

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट, आध्यात्मिक गुरु अण्णा महाराज, विधायक संजय शुक्ला, विशाल पटेल सहित शहर के प्रबुद्धजन भी मौजूद थे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से इस मामले में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके राजस्थान के कोटा शहर में किसी कार्यक्रम में व्यस्त होने की वजह से संपर्क नहीं हो सका।

ताई की ये बातें भी चर्चा में रहीं..

संवाद विमर्श कार्यक्रम में सुमित्रा महाजन (ताई) ने बातों-बातों में चुटकियां भी लीं। अपनी बात आरंभ करते ही जब राज्यपाल ने उनसे कहा, बैठकर बोलिए, तो उन्होंने कहा कि कोई परेशानी नहीं है, लेकिन फिर भी बैठ जाती हूं, अब खड़ी नहीं रहूंगी।

जीतू पटवारी के लिए ताई ने कहा..

जीतू पटवारी के लिए ताई ने कहा कि रास्ते में किसी ने मुझसे कहा कि ताई, जीतू आपका शिष्य है, तब मैंने कहा कि जीतू मेरा शिष्य नहीं है, लेकिन वह अपने व्यवहार से मेरा शिष्य कहला सकता है।

Posted By: Bhupendra Singh

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